प्रदीप द्विवेदी
बांदा। कृषि विभाग स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। किसानों व विभाग के बीच की कड़ी कहे जाने वाले किसान सहायकों के 66 पदों में महज 22 की तैनाती है। इनमें भी करीब 10 किसान सहायक कृषि विभाग के विभिन्न दफ्तरों में बाबू का काम निपटा रहे हैं। विभाग के मुखिया का पद आठ सालों से रिक्त है। विभाग में तैनात गिने-चुने अफसर व कर्मी फाइलों में सारा गुणा-भाग कर रिपोर्ट शासन को भेज देते हैं। ऐसे में महत्वाकांक्षी योजनाओं की जानकारियां ज्यादातर किसानों तक पहुंच नहीं पाती और न ही वे इनका लाभ उठा पाते हैं।
विभाग में ऊपर से लेकर नीचे तक ज्यादातर पद वर्षों से रिक्त हैं। किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देने व उनकी समस्याएं अधिकारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी किसान सहायकों की होती है।
जिले में 66 किसान सहायकों (प्राविधिक सहायक ग्रुप सी) के पद सृजित हैं। इनमें महज 22 की तैनाती है। स्टाफ की कमी के चलते आठ किसान सहायक कार्यालय में बाबुओं का काम निपटा रहे हैं तथा करीब आधा दर्जन गोदाम में ड्यूटी बजा रहे हैं।
प्राविधिक सहायक ग्रुप ए (किसान सहायक तहसील स्तर) में 13 पद सृजित हैं, पर इनमें दो की तैनाती है। 11 पद सालों से नहीं भरे गए। उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी (एसडीओ) के चार पद हैं। इनमें एक की ही तैनाती है। एसडीओ की शासन की योजनाएं किसानों तक पहुंचाने की अहम जिम्मेदारी होती है।
विभाग के मुखिया जिला कृषि अधिकारी का पद आठ वर्षों से खाली है। सहायक नियोजन मृदा परीक्षण (टीओ) तथा जिला कृषि रक्षा अधिकारी के पद चार माह से रिक्त हैं। भूमि संरक्षण अधिकारी के तीन पद हैं, पर एक की तैनाती है। दो पद सालों से नहीं भरे गए। जबकि डीडी कृषि दफ्तर में दो लेखाकार के पद हैं और दोनों खाली हैं। वरिष्ठ सहायक के 10 सृजित हैं, इनमें चार खाली हैं। कनिष्ठ सहायक के छह पदों में तीन रिक्त हैं।