बांदा। लो-वोल्टेज समस्या नलकूप विभाग पर भारी पड़ रही है। पर्याप्त वोल्टेज न मिलने से हर माह डेढ़ दर्जन नलकूपों की मोटरें फुंक रही हैं। एक मोटर की मरमम्त में करीब 16 हजार खर्च हो रहा है। यानी हर माह नलकूप विभाग को करीब पांच लाख रुपए की चपत लगती है। राजकीय नलकूपों से किसानों को सिंचाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
जिले में स्थापित 513 राजकीय नलकूपों में अधिकांश यांत्रिक व विद्युत दोष की कमी से बंद हैं। खराबी का ठीकरा नलकूप विभाग बिजली महकमे पर फोड़ रहा है। उधर, बिजली विभाग का कहना है कि खामियां छिपाने को नलकूप विभाग बहानेबाजी कर रहा है। करीब 45 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई नलकूपों से होती है। नलकूप विभाग के आंकड़ों की मानें तो जिले में इस समय 18 नलकूप यांत्रिक खराबी से तथा दर्जन भर नलकूप विद्युत दोष से ठप हैं। लो-वोल्टेज नलकूप विभाग को अखर रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हर माह करीब 18 नलकूपों की मोटरें कम वोल्टेज के चलते फुंक जाती हैं। सही वोल्टेज आए तो विभाग की यह फिजूल खर्ची रोकी जा सकती है। इसके अलावा नलकूप के लिए आई विद्युत लाइन व ट्रांसफार्मर से निजी नलकूप व चक्की कारखाना चलाए जा रहे हैं। ऐसे में वोल्टेज डाउन हो जाता है। 11000 की जगह 9000 वोल्ट मिल रहा है। इससे मोटर लोड नहीं ले पाती।