रामशरण दीक्षित
बांदा। चालू वित्तीय वर्ष में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) पूरे साल रफ्तार नहीं पकड़ पाई। अधिकारियों की तमाम हिदायतें भी काम नहीं आईं। एक माह बाकी रहते मात्र एक फीसदी परिवारों को 100 दिन काम मिल पाया। धनराशि खर्च करने में भी कार्यदाई संस्थाएं फिसड्डी रहीं। 25 करोड़ रुपए खातों में डंप है।
मनरेगा के तहत जिले की 437 ग्राम पंचायतों में 1,95,753 परिवारों को जॉब कार्ड वितरित किए गए हैं। मनरेगा कानून के तहत जाब कार्डधारक परिवार के प्रत्येक सदस्य को 100 दिन काम दिए जाने की गारंटी का प्राविधान किया गया है लेकिन जिले में यह रोजगार गारंटी हवा-हवाई साबित हो रही है। 11 माह बीतने के बाद मात्र 1918 परिवारों को 100 दिन काम मिला। जनसंख्या और ग्राम पंचायतों के लिहाज से सबसे खराब हालत नरैनी ब्लाक की है। यहां 77 ग्राम पंचायतों में पंजीकृत 35,165 जॉब कार्ड धारक परिवारों में 173 को 100 दिन काम मिला। बड़ोखर खुर्द ब्लाक में पंजीकृत 2,38,886 परिवारों में 392, जसपुरा में पंजीकृत 13,262 परिवारों में 86, तिंदवारी में पंजीकृत 21,396 परिवारों में 167 और महुआ ब्लाक की 71 ग्राम पंचायतों में पंजीकृत 2,84,459 परिवारों में 355 परिवारों को 100 दिन काम करने का अवसर मिला।
बबेरू ब्लाक की 57 ग्राम पंचायतों में 27,523 परिवार पंजीकृत हैं। यहां 382 परिवारों को 100 दिन काम दिया गया। बिसंडा ब्लाक में 26,886 परिवारों में 105 और कमासिन ब्लाक में पंजीकृत 19,176 परिवारों में 205 परिवारों को 100 दिन काम मिला। पीडब्ल्यूडी की तीन इकाइयों ने 54 परिवारों को 100 दिन काम देने का दावा किया है।
उधर, धनराशि खर्च करने में भी ग्राम पंचायतों ने कंजूसी दिखाई। वित्तीय वर्ष के मात्र एक माह शेष रहते तमाम ग्राम पंचायतें 60 फीसदी रकम भी खर्च नहीं कर पाईं। सबसे फिसड्डी महुआ ब्लाक रहा। यहां 48 फीसदी रकम खर्च हुई है। छह करोड़ 37 लाख 51 हजार रुपए पंचायतों के खातों में डंप है। बड़ोखर खुर्द ब्लाक में 58 फीसदी धनराशि खर्च के बाद तीन करोड़ 84 लाख 61 हजार और जसपुरा ब्लाक में 52 फीसदी खर्च करने के बाद दो करोड़ 32 लाख रुपए खातों में हैं। नरैनी में दो करोड़ 15 लाख 30 हजार, बबेरू में दो करोड़ 73 लाख छह हजार, कमासिन में एक करोड़ 61 लाख 11 हजार और बिसंडा में 57 लाख 21 हजार रुपए पंचायतों के खाते में जमा हैं।