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‘उन्नत नस्ल की गाय पहुंचाएंगे गांवों में’

Banda Updated Fri, 19 Apr 2013 05:30 AM IST
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बांदा। बुंदेलखंड में फसलों के लिए नासूर बन चुकी अन्ना प्रथा रोकने को प्रगतिशील किसान ने अनूठी पहल की है। कृषि फार्म में हरियाणा, शाहीवाल, गीर, निमारी व काकरेच नस्ल के दर्जनों बछड़ा-बछिया तैयार कर उन्हें गांव-गांव फैलाने की मुहिम छेड़ दी है। उनका दावा है कि आने वाले दिनों में घर-घर बेहतर नस्ल के मवेशी हो जाएंगे। इससे अन्ना प्रथा पर तो रोक लगेगी ही साथ ही दूध का उत्पादन बढ़ेगा।
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बड़ोखर खुर्द गांव के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह नए प्रयोगों के लिए जाने जाते हैं। कभी फसलों में तो कभी मवेशियों पर तरह-तरह प्रयोग कर बुंदेलखंड में नहीं, बल्कि देश व विदेशों तक जागरूकता फैला रहे हैं। यही वजह है कि उनके कृषि फार्म में स्थानीय किसानों के साथ विदेशी मेहमानों तथा कृषि वैज्ञानिकों का जमघट लगा रहता है। प्रेम सिंह ने अब बुंदेलखंड के किसानों को अन्ना प्रथा से निजात दिलाने को अपनी अनूठी पहल की है। उनका मिशन है कि 2016 तक उनकी इस मुहिम का असर बुंदेलखंड में दिखे। उनके कृषि फार्म में इन दिनों हरियाणा, शाहीवाल, गीर (गुजराती), निमारी (महाराष्ट्र) व काकरेच (राजस्थानी) नस्ल के करीब तीन दर्जन गोवंश पल रहे हैं। हरियाणा व शाहीवाल नस्ल के सात जोड़े बछिया-बछड़ा तथा गीर, निमारी तथा काकरेज नस्ल के चार-चार जोड़े बछड़ा व बछिया तैयार हैं। प्रेम सिंह का मकसद है कि उन्नत नस्ल के जोड़े तैयार कर गांव-गांव पहुंचाना है। अन्ना प्रथा रोकने के लिए उन्होंने अपने गांव में आजमाइश की और सफल रहे। इस दौरान पूरे गांव में विभिन्न नस्लों की 60 गाय व आधा दर्जन साड़ हैं। उन्होंने कहा कि इन नस्ल की गायें 10 से 20 लीटर दूध देती हैं। खेती के साथ किसानों की इससे आय बढ़ेगी और गांवों से बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवकों का पलायन भी रुकेगा। वर्ष 2004 से इस मिशन में जुटे प्रगतिशील किसान के फार्म में तैयार विभिन्न नस्ल की गाय बांदा, हमीरपुर, महोबा के साथ मध्य प्रदेश के कई गांवों तक पहुंच चुकी हैं।
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