खप्टिहाकलां। पाथेश्वरी शक्तिपीठ में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते हुए पंडित राजू व्यास ने इंद्रियों को भगवान से जोड़ने की सलाह दी।
कृष्ण-गोपी प्रसंग में बताया कि ज्ञान में इंद्रियों के आवेग को त्यागने की जरूरत है। भक्ति में इन्हें त्यागने की जगह भगवान से जोड़ना चाहिए। गोपियों ने भगवान श्रीकृष्ण से कांता भाव का प्रेम किया। यह 11 प्रकार की भक्तियों में 7वीं भक्ति है। नारद भक्ति सूत्र के मुताबिक किसी भी तरह से भगवान से संपर्क जुड़ने से कल्याण होता है। शिशुपाल, कंश, रावण आदि इसके उदाहरण हैं। गोवर्धन लीला में श्रीकृष्ण के उंगली पर गोवर्धन पहाड़ उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा का वर्णन किया। कथा में गायक रामदास द्विवेदी, तबले पर रोहित (भुलसी) ने संगत की। आचार्य पंडित महेंद्र तिवारी आदि मौजूद रहे।