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खून देकर जिंदगियां बचाएंगे युवा

Banda Updated Tue, 01 Oct 2013 05:38 AM IST
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बांदा। ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ के रक्तदान शिविर में मंगलवार को युवा वर्ग बढ़ चढ़कर खून दान करेगा। इसी जज्बे के चलते शिविर की पूर्व संध्या पर ही युवक रक्तदान के लिए रजिस्ट्रेशन कराने आ गए। फाउंडेशन की तरफ से मंगलवार को विश्व रक्तदान दिवस के मौके पर बांदा, महोबा, चित्रकूट और हमीरपुर में जिला अस्पताल में सुबह नौ बजे से रक्तदान शिविर का आयोजन किया जाएगा।
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बुंदेलखंड नव निर्माण सेना ने शिविर में सबसे पहले रक्तदान का फैसला किया है। अध्यक्ष रविमोहन श्रीवास्तव समेत भूपेंद्र सिंह गौतम, कौशल किशोर गुप्ता, मोहम्मद साजिद, ज्ञानेंद्र कुमार शानू, श्याम प्रजापति, मोहम्मद जीशान, वरुण शुक्ला और अभिषेक कुमार सिंह आदि ने नाम दर्ज कराए हैं।
इसी तरह राजीव गांधी डीएवी महाविद्यालय के छात्र आमोद कुमार श्रीवास, अजय सिंह और अर्जित अग्रवाल आदि अपने कालेज के प्रवक्ता डा.विवेक पांडेय के निर्देशन में रक्तदान करेंगे। केसीएनआईटी, व्यापार मंडल, माध्यमिक शिक्षक संघ, एनसीसी कैडेट, स्काउट-गाइड, विकास भवन कर्मचारी संघ, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, निरंकारी सत्संग मंडल, एनएसएस आदि संगठनों ने भी रक्तदान की कर जनपद के जरूरतमंद मरीजों और घायलों की जान बचाने की मंशा जताई है।
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शिविर में डाक्टरों की विशेष ड्यूटियां
बांदा। मुख्य चिकित्साधिकारी कैप्टन डॉ.आरके सिंह ने कहा है कि रक्तदान शिविर के लिए डॉक्टरों और कर्मचारियों की विशेष ड्यूटियां लगाईं गईं हैं। वह खुद भी शिविर में शरीक होंगे। उन्होंने ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ के इस आयोजन की जमकर सराहना की।
उधर, जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्साधीक्षक डा.शेखर और ब्लड बैंक प्रभारी डा.एसके वाजपेयी ने शिविर में रक्तदान की विशेष व्यवस्थाएं की हैं। उन्होंने कहा कि 18 से 65 वर्ष उम्र तक का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति हर तीन माह में रक्त दान कर सकता है। यह बेहद पुनीत काम है। कहा कि लगभग रोज मरीजों या दुर्घटना का शिकार लोगों को खून की जरूरत पड़ती है। खून देने से कोई कमजोरी हरगिज नहीं आती। उधर, डीपीएम वीके शुक्ला ने भी रक्तदान को महान पुनीत काम बताते हुए कहा कि प्रसव के दौरान लगभग 70 फीसदी महिलाओं को रक्त की जरूरत पड़ती है। अक्सर समय से खून न मिल पाने से उनकी मौत हो जाती है। रक्तदान के बाद कोई भी अतिरिक्त पौष्टिक आहार लेना जरूरी नहीं है। सिर्फ एक यूनिट (350 एमएल) रक्तदान से शरीर में कोई कमी नहीं आती। खून तत्काल पुन: बन जाता है।


खून देकर बचाएं मासूम बिट्टो की जिंदगी
बांदा। पांच वर्ष की बिट्टो सिंह (महुई खुर्द) को तत्काल खून न मिला तो यह मासूम शायद दुनिया की खुशियां देख न सके। इसी तरह 22 वर्षीय मीरा (कोर्रही) को भी फौरन ही खून की दरकार है। यह दोनों बेसब्री से खून दाताओ की राह ताक रहे हैं।
जिला अस्पताल में खून की कमी वाले मरीजों की तादाद रोज अच्छी खासी रहती है। ‘विश्व रक्तदान दिवस’ (1 अक्तूबर) की पूर्व संध्या पर बिट्टो, मीरा और आसमां समेत कई मरीज जिला अस्पताल में भर्ती किए गए हैं। इनको डॉक्टरों ने फौरन खून चढ़ाए जाने की जरूरत बताई है। पहली अक्तूबर को ‘अमर उजाला फाउंडेशन’ जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में रक्तदान शिविर आयोजित कर रहा है। यहां दान किए गए रक्त से ऐसे ही जरूरतमंदों को खून देकर उनकी जिंदगी बचाई जा सकेगी। ब्लड बैंक में पर्याप्त क्षमता होने के बावजूद रक्त उपलब्ध न होने से अक्सर जानें चलीं जाती हैं। मरने वाले ज्यादातर गरीब होते हैं। वह मुंह मांगी कीमत देकर खून नहीं खरीद सकते। अक्सर तो पैसे वाले भी खून के लिए तरस जाते हैं। खून का विकल्प सिर्फ खून है।
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