बबेरू। बहुप्रतीक्षित और एशिया की सबसे बड़ी कही जाने वाली चौधरी चरण सिंह औगासी पंप कैनाल सिंचाई परियोजना के लोकार्पण की घड़ी आ ही गई। प्रदेश के वरिष्ठ कबीना मंत्री शिवपाल सिंह मंगलवार को समारोहपूर्वक लोकार्पण की रस्म अदा करेंगे। क्षेत्रीय लोगों की उम्मीदों पर भले ही यह खरी न उतरे लेकिन सिंचाई विभाग अधिकारी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। असलियत यह है कि पूरी क्षमता से सभी पंप चालू कर दिए जाएं तो नहरें ध्वस्त हो जाएंगी।
1672 लाख रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना से डेढ़ दर्जन से ज्यादा गांवों को पानी देने की मंशा थी। इसकी क्षमता 150 क्यूसिक पानी है लेकिन मात्र दो पंप ही चालू किए गए हैं। तीसरा पंप चालू कर दिया जाए तो नहरें टूट जाएंगी। औगासी पंप कैनाल के नाम से बनी यह परियोजना औगासी गांव को ही एक बूंद पानी नहीं दे पा रही यानी चिराग तले अंधेरा है। न ही गांवों तक पानी पहुंच पा रहा है। नहरें जगह-जगह टूटी रहती हैं। नवंबर 2013 में केंद्रीय दल के डा. जेएस सामरा के आगमन पर सिंचाई विभाग के अभियंताओं ने जोड़-तोड़ कर एक पंप चालू कर दिया था लेकिन तब तक यहां की फसलें सिंचाई के अभाव में सूख चुकी थीं। डा. सामरा ने इसके लिए सिंचाई विभाग अफसरों को फटकार भी लगाई थी।
इस योजना से जिन गांवों को सरसब्ज बनाने का सपना दिखाया गया था उनमें समगरा, कलाना, उसरा, मरका, पिंडारन, भभुवा, करहुली, सांड़ा, अधांव, अरमार, गुजेनी, चरका, मटेहना, मुड़वारा और समशुद्दीनपुर आदि गांव शामिल हैं। हालांकि आज तक किसी भी गांव में टेल तक पानी नहीं पहुंचा। योजना में 4 पंप लगे हैं। फिलहाल तीन पंप चलाने की तैयारी है लेकिन हकीकत यह है कि एक साथ तीनों पंप चल गए तो नहरें टूट जाएंगी। सिंचाई मंत्री शिवपाल को चुस्त और दुरुस्त दिखाने के लिए विभागीय अभियंता रात-दिन एक किए हैं। रंग-रोगन से परियोजना को नया कलेवर दिया जा रहा है। विभागीय अधिकारी यहीं डेरा डाले हैं।