बांदा। बोरिंग के पास सो रहे पिता-पुत्र को लाठियों से पीटने के बाद भागते समय पुत्र को गोली मारकर घायल कर देने के जुर्म में आरोपी को 10 वर्ष की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह जेल में और बिताने होंगे।
घटना 7 अगस्त 2002 की है। गिरवां थाना क्षेत्र के अमृतपुर खेरवा गांव निवासी रामआसरे द्विवेदी ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह अपने पुत्र विनोद कुमार के साथ खेत में बोरिंग के पास सो रहा था। नजदीक में ही नौकर भी सो रहा था। आधी रात बाद 7-8 बदमाश आए और उसे और पुत्र को लाठियों से पीटकर घायल कर दिया। उनकी चीख-पुकार सुनकर गांव के लोग ललकारते हुए घटनास्थल की ओर दौड़े तो बदमाशों ने तमंचे से पुत्र विनोद कुमार को गोली मार दी। गोली मारने वाले को विनोद ने पहचान लिया। वह इसी गांव का रामनरेश शुक्ला पुत्र बल्देव था। उसे नामजद करते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई गई। पुलिस ने अदालत में बताया कि आरोपियों के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिल रहे हैं। विवेचना की जा रही है।
शासकीय अधिवक्ता ने सात अभियुक्तों में हजारीलाल उर्फ हजारिया, रामबाबू त्रिपाठी व चुन्नीलाल प्रजापति, बैजू यादव, चंदन, गणेश को अदालत में तलब किए जाने की अर्जी दी। अदालत ने इस अर्जी को स्वीकार कर ली। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता कैलाश चौबे व वसीम उल्ला खां ने सात गवाह पेश किए। घटना के करीब 12 साल बाद शनिवार को विशेष न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र) रामकुमार ने इस मुकदमे का फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने अभियुक्त रामनरेश शुक्ला को धारा 307 का दोषी पाते हुए 10 वर्ष की कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी। जुर्माना अदा न करने पर तीन माह और जेल में बिताने होंगे।