एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

चंदेल कालीन तालाबों के अस्तित्व पर संकट

Banda Updated Tue, 13 May 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

मटौंध। नगर पंचायत में चंदेल कालीन तालाबों का अस्तित्व खतरे में है। यहां सुप्रीम कोर्ट का आदेश बेअसर है। पुलिस प्रशासन की मौन सहमति पर तालाब के भीटों पर दबंगों ने कब्जा कर मकान बना लिए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

नगर पंचायत में आधा दर्जन तालाब हैं। भुजा तालाब का रकवा 120 बीघे का है। इस तालाब को पाटकर दबंगों ने दर्जनों मकान बना लिए। कूड़ा-कचरा डालकर पाटने का क्रम जारी है। नवा तालाब का रकबा 40 बीघा है। भूमाफियाओं ने इसे भी नहीं बख्शा। आज तालाब 10 बीघे में भी नहीं रह गया। नैनी तालाब का रकबा 20 बीघा और हरेरा तालाब का रकबा 10 बीघा है। दबंगों ने इनमें घाट व भीटों तक कब्जा कर लिया है। शुकुल तालाब का रकबा 100 बीघा है। लहुरवा तालाब 60 बीघे में फैला है। इन दोनों तालाबों पर अवैध कब्जा नहीं है, पर सुंदरीकरण न होने से इनका अस्तित्व भी खत्म हो रहा है। तालाबों में पानी भरने की कोई व्यवस्था नहीं है। नगर पंचायत अध्यक्ष बिंदा पाल ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि ये नगर पंचायत के अधिकार क्षेत्र के बाहर हैं। प्रधान रामप्रकाश तिवारी ने भी गंभीरता से कोई जवाब नहीं दिया। गुलाब सिंह, छेदीलाल रैकवार, जगदेव सिंह, गौरव सिंह, पारथ कुमार, संजीव शुक्ला इत्यादि ने शासन-प्रशासन से इन ऐतिहासिक तालाबों के जीर्णोद्धार व अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है।
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें