बांदा। परिवहन विभाग में कृषि कार्यों के लिए पंजीकृत ट्रैक्टरों की हजारों ट्रालियां व्यवसायिक कार्यों में इस्तेमाल की जा रही हैं। सिर्फ सवा दो फीसदी ट्रालियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। शेष ट्रालियां बिना रजिस्ट्रेशन ट्रैक्टरों के साथ फर्राटे मार रही हैं। खेत से ज्यादा यह ट्रालियां सड़कों पर भाड़ा ढोते देखी जा रही हैं।
यहां परिवहन विभाग में कुल 5204 ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन है। इनमें लगभग 5146 कृषि कार्य के लिए और 58 ट्रैक्टर व्यवसायिक कार्य के लिए पंजीकृत हैं। शायद ही कोई ऐसा ट्रैक्टर हो, जिसके साथ ट्राली न हो। लेकिन परिवहन विभाग में सिर्फ 115 ट्रालियां ही दर्ज हैं। इनमें 56 ट्रालियां कृषि कार्य और 59 व्यवसायिक कार्य के लिए पंजीकृत हैं। वर्ष 2013-14 में 1093 ट्रैक्टरों का पंजीकरण कराया गया। इनमें 5 ट्रैक्टरों का रजिस्ट्रेशन व्यवसायिक में हुआ है। 18 ट्राली व्यवसायिक व एक ट्राली कृषि कार्यों में पंजीकृत है। रात-दिन सड़कों पर ट्रैक्टरों से बंधी ट्रालियां गिट्टी, बालू, सीमेंट, मिट्टी, लोहे की सरिया आदि ढोकर भाड़ा वसूल रही हैं। बारातियों को ढोने में भी किराया वसूला जा रहा है। आरटीओ वीके पांडेय ने बताया कि कृषि कार्य के लिए ट्रैक्टर पंजीकरण में कोई शुल्क नहीं लिया जाता। लेकिन व्यवसायिक कार्यों में इस्तेमाल होने वाले ट्रैक्टर का पंजीकरण शुल्क 1125 रुपये है।