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भाड़े के शूटरों से बच गए थे सपा नेता बादल

Banda Updated Wed, 13 Aug 2014 05:30 AM IST
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बांदा। मटौंध नगर सपा अध्यक्ष बादल खां पर मौत का साया कई सालों से मंडरा रहा था। सत्ता पक्ष के जुड़े होने के चलते उन्हें शासन से पुलिस गनर भी मिल गया था। हाल ही में नेताओं के गनर वापस लिए जाने के शासन के फैसले पर बादल भी गनर विहीन हो गए थे।
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पिछले साल 26 सितंबर को देर शाम मटौंध थाने से चंद कदम दूर इचौली तिराहे पर सपा नगर अध्यक्ष बादल खां चाय की दुकान पर बैठे थे। तभी दो बाइकों पर सवार चार संदिग्ध लोग वहां आ गए। सपा नेता के नजदीक बैठे दरोगा और दो सिपाहियों ने उनका पीछा किया।
रेलवे क्रासिंग के पास दौड़ाकर दो बदमाशों को दबोच लिया। दो फरार हो गए। दबोचे गए लोगों के पास तमंचे और 13 कारतूस बरामद हुए थे। दबोचे गए अभियुक्तों के नाम नाम अनिल सिंह पुत्र बाबू सिंह (महेवा, कबरई) और राजेश प्रजापति पुत्र रामचरन (बघवा, कबरई) बताए गए। तत्कालीन थानाध्यक्ष ने बताया था कि पकडे़ गए दोनों बदमाशों ने स्वीकारा था कि उन्हें बांदा शहर को क्योटरा निवासी बादल के दुश्मन ने छह लाख रुपये में सुपारी दी थी। तब से बादल लगातार फरार आरोपियों और सुपारी देने वालों की गिरफ्तारी की मांग करते रहे। अपनी हत्या की आशंका लगातार जताते रहे। मटौंध और शहर कोतवाली पुलिस पर आरोपियों से मिलीभगत के आरोप लगाए।
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सपा नेता भी बादल की वकालत और सिफारिश करते रहे। इसके बावजूद सरेशाम और सरे चौराहा उनकी और उनके मुनीम की हत्या कर दी गई। मृतक बादल अपने पीछे पत्नी और कई मासूम बच्चे छोड़ गए हैं।
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