बांदा। ‘टॉयलेट का टेंशन’ को लेकर ‘अमर उजाला’ की मुहिम का असर नजर आने लगा है। सरकारी दफ्तरों और शिक्षा संस्थानों में शौचालय के लिए शर्मिंदगी का सामना कर रही महिलाओं को अब इस टेंशन से निजात मिल सकेगी। विभागों ने इस पर कार्रवाई और अमल शुरू कर दिया है। सबसे पहला असर डीएम कार्यालय (कलेक्ट्रेट) में हुआ। यहां अरसे से बंद पड़े नवनिर्मित शौचालय महिलाओं के लिए खोल दिए गए हैं। उधर, विकास भवन में महिला टॉयलेट की नियमित सफाई होने लगी है।
कलेक्ट्रेट, विकास भवन, न्यायालय परिसर, बेसिक शिक्षा कार्यालय, परिवहन कार्यालय, जिला अस्पताल, रोडवेज आदि में महिला कर्मियों और फरियादी महिलाओं के लिए अलग शौचालय नहीं है। जहां हैं वहां गंदे या बंद पड़े थे। ‘अमर उजाला’ लगातार इस बारे में खबरें प्रकाशित कर रहा है। अब इसका असर नजर आने लगा है। कलेक्ट्रेट परिसर में एक गंदा व जीर्ण-शीर्ण शौचालय है। उसमें जाने लायक नहीं है। इसके बगल में विकलांगों के लिए नवनिर्मित शौचालय में सालभर से ताला जड़ा था। महिला कर्मियों या लेडीज फरियादियों के लिए अलग शौचालय नहीं था। अब डीएम ने विकलांग शौचालय को महिलाओं के लिए आरक्षित करके ताला खुलवा दिया है। इससे महिला कर्मियों ने राहत महसूस की है। विकास भवन के भू-तल में महिलाओं के लिए अलग टॉयलेट नहीं था। पुरुषों के लिए बने शौचालय गंदगी से पटे थे। विकास भवन में लगभग एक सैकड़ा महिला कर्मचारी हैं। इनके अलावा फरियादी महिलाओं को भी टॉयलेट का टेंशन था। अब सीडीओ प्रमोद कुमार शर्मा के आदेश पर गंदे पड़े टॉयलेट को चमाचम कर दिया गया है। महिलाओं के लिए भी साफ-सुथरी व्यवस्था की गई है। महिला कर्मी मीडिया की इस मुहिम से खुश हैं।