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खेल शुल्क में ‘खेल’, छात्रों से वसूली

Banda Updated Sat, 27 Sep 2014 05:32 AM IST
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बांदा। स्कूल स्तर पर जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं की सूची तो जारी कर दी गई है, लेकिन बजट का अता-पता नहीं है। ऐसे में राजकीय, शासकीय और स्ववित्त पोषित स्कूलों में प्रत्येक छात्र से 15 रुपये वसूले जा रहे हैं। जबकि शासन से 9वीं से 12वीं तक हर माह प्रति बच्चा 5 रुपये क्रीड़ा शुल्क निर्धारित है। प्रधानाचार्य खेल के नाम पर लाखों का खेल कर रहे हैं। डीआईओएस दफ्तर भी इसमें शामिल हैं।
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सरकार ने पिछले कई सालों से खेलकूद का बजट तो बढ़ाया नहीं, लेकिन स्टूडेंट्स से वसूला जाने वाला शुल्क दो रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये कर दिया है। बावजूद इसके स्टूडेंट्स से 15 रुपये की वसूली की जा रही है। उधर, डीआईओएस कार्यालय का कहना है कि शासन से खेल के लिए कोई बजट नहीं आता। इसलिए स्टूडेंट्स से पैसा लिया जाता है। इस सत्र में अभी तक 9वीं से 12वीं तक के 100 स्कूलों के छात्रों से 15-15 रुपये के हिसाब से वसूले गए करीब दो लाख रुपये डीआईओएस कार्यालय में जमा किए जा चुके हैं। इसका कुछ अंश खर्च करके अभी तक स्टेट लेवल की एकमात्र तैराकी प्रतियोगिता आयोजित की गई है।


शासनादेश और हकीकत
बांदा। शासनादेश है कि राजकीय व स्ववित्त पोषित स्कूलों से ही खेल मद में भुगतान लिया जाएगा। हकीकत यह है कि शासकीय, सहायता प्राप्त के अलावा स्ववित्त पोषित स्कूलों से भी शुल्क वसूला जा रहा है। इसमें डीआईओएस की तरफ से भी निर्देश हैं। शासनादेश है कि कक्षा 9 के बच्चों से प्रति माह 40 पैसे, कक्षा 10 के बच्चों से प्रतिमाह 5 रुपये, कक्षा 11 के छात्रों से 60 पैसे और कक्षा 12 के बच्चों से पांच रुपये का भुगतान लिया जाएगा। हकीकत यह है कि माध्यमिक स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12 तक के हर छात्र से 15 रुपये वसूले जा रहे हैं। इस पैसे से जिला, मंडल और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं होंगी। स्कूल में जमा होने वाले बजट से स्कूल में खेलकूद की सुविधा दी जाएगी। खास बात यह है कि स्ववित्त पोषित स्कूलों से पैसा वसूल कर उन्हें खेलकूद के लिए आमंत्रित भी नहीं किया जाता। स्कूल छात्रों से स्पोर्ट्स के नाम पर पैसा तो लेता है, लेकिन सुविधा कुछ नहीं दी जाती है। राजकीय स्कूलों में प्ले ग्राउंड के नाम पर घास उगी हुई है तो स्ववित्तपोषित स्कूलों से ग्राउंड गायब हैं।
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बजट मिलता नहीं, कामन पूल का लेते शुल्क
जिला विद्यालय निरीक्षक एनडी वर्मा ने बताया कि शासन से खेलकूद के लिए कोई बजट नहीं आता। प्रतियोगिताएं अच्छी हो जाएं, इसके लिए छात्रों से वार्षिक क्रीड़ा शुल्क जमा कराया जाता है। जिला स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए कामन पूल का 10 रुपये प्रति छात्र जमा कराया जाता है।
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