बांदा। आल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आर सेटी) की ओर से जेएन पीजी कॉलेज के खेल कैंपस में छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम जल प्रबंधन व मृदा परीक्षण की शुरुआत की गई। इस मौके पर कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कृषि व पशुपालन से संबंधित तकनीकी जानकारियां दी।
स्टेट कोआर्डिनेटर सीपी गुप्ता ने शिविर के पहले दिन किसानों को बरसात के पानी का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि बारिश का पानी यदि किसान खेत में रोक लें तो यह पूरे वर्ष खेतों में नमी बनाए रहेगा। इससे उन्हें ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ेगी। संस्था निदेशक केपी दिनकर ने खेती की भूमि को खेती के योग्य किस तरह बनाया जाए तथा कम मेहनत में किस तरह बेहतर उपज ली जाए, इस बाबत विस्तार से जानकारी मुहैया कराई। उन्होंने बताया कि पर्याप्त खेत होते हुए भी किसान पलायन को मजबूर हैं। उनके बेरोजगार बेटे परदेश जा रहे हैं। केंद्र सरकार के ग्रामीण मंत्रालय ने इसे गंभीरता से लिया है। किसानों को खेती की तकनीकी जानकारी देने के लिए प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। उन्हें स्वावलंबी बनाने पर जोर दिया जा रहा है। क्षेत्रीय मृदा परीक्षण व कल्चर के राजेश वर्मा ने किसानों को माइक्रो लैब, सिंचाई जल निकासी, सिंचाई विधियां, मृदा के प्रकार, पोषक तत्व, रासायनिक खादों के उपयोग व उन्नतशील पशुओं तथा उनकी बीमारियों के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण कार्यक्रम तीन सितंबर तक चलेगा। कार्यक्रम समन्वयक सीमा खान, इदरीश खान, डॉ. विश्वकर्मा, जसवंत सिंह, बाबूलाल, जितेंद्र कुमार, शिवजीत कुमार, रोहित कुमार, श्यामबाबू पटेल, रामस्वरूप, कामता प्रसाद, ललित सिंह, रामकरन, बीर बहादुर, बिंदा सिंह, तीरथ सिंह, सत्येंद्र सिंह, गोरेलाल, कालिका प्रसाद, योगेंद्र प्रसाद, कृष्ण गोपाल, बालकरन, कधंइया आदि मौजूद रहे।