बांदा। दलित युवक की हत्या में जुर्म साबित हो जाने पर अदालत ने वृद्धा और उसके दो बेटों को आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत से यह फैसला घटना के पांच साल बाद हुआ।
मामला जसपुरा थाना क्षेत्र के बरेहटा गांव का है। अनुसूचित जाति के गयाचरन पुत्र रामनाथ ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 28 अगस्त 2007 की रात करीब 10 बजे रक्षाबंधन त्योहार पर घर आए उसके भाई श्रीकृष्ण उर्फ दानूबादे (24) को दो सगे भाई सभाजीत व इंदा उर्फ इंद्रजीत और उनकी मां चंपा देवी पत्नी रामाधार सिंह ने लाठी, डंडा, फरसा और लोहे की छड़ से हमलाकर हत्या कर दी। फिर लाश को घसीट ले गए और तालाब में फेंक दिया। पुलिस ने मां और दोनों बेटों के विरुद्ध हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया कि मृतक दानूबादे हमलावर सभाजीत सिंह के यहां चारा काटने का काम करता था। इसी बीच उसके सभाजीत सिंह की पत्नी से संबंध हो गए। परिजनों को भनक लगी तो उन्होंने दानूबादे को मार देने की योजना बनाने लगे। इस पर दानूबादे के परिजनों ने उसे बरेहटा गांव से हटाकर साथी (बबेरू) गांव भेज दिया। वहां दानूबादे चमड़े का काम करने लगा। रक्षाबंधन पर गांव बरेहटा आया हुआ था। तभी उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस ने तीनों आरोपियों को हत्या में प्रयुक्त आला कत्ल के साथ गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर सात गंभीर चोटें बताईं गईं। तफ्तीश के बाद पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। विशेष लोक अभियोजक नवीन दुबे ने सात गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने सिर्फ एक साक्ष्य पेश किया। दोनों पक्षों की बहस और पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मंगलवार को विशेष न्यायाधीश (एससीएसटी एक्ट) रामाधार राम ने इस मामले का फैसला सुनाया। न्यायाधीश ने आरोपी मां और दोनों पुत्रों को धारा 302/34 में उम्रकैद व 10-10 हजार रुपए जुर्माना, धारा 201 में पांच-पांच वर्ष की साश्रम कारावास और पांच-पांच हजार रुपए जुर्माना, धारा 504 में एक-एक वर्ष की कैद और एक-एक हजार रुपए जुर्माना की सजा सुनाई। जुर्माना न अदा करने पर क्रमश: एक-एक वर्ष, छह-छह माह और एक-एक माह की अतिरिक्त कैद होगी। सभी सजाएं साथ चलेंगी। तीनों मुजरिमों को जेल भेज दिया गया है।