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‘....जो अपनी प्रेमिका से राखी बंधा रहे हैं’

Banda Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST
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बांदा। काव्य गोष्ठी में साहित्यकारों और कवियों ने रोचक व सारगर्भित रचनाएं पेश कीं। हिंदी के उत्थान पर विचार व्यक्त किए। आयोजन अखिल भारतीय साहित्यकार परिषद ने किया था।
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परिषद परिसर में रविवार को गोष्ठी की शुरूआत मुख्य अतिथि तिंदवारी इंटर कालेज प्रधानाचार्य डा.भानुप्रताप ने सरस्वती प्रतिमा में माल्यार्पण से की।
कवि प्रकाशचंद्र सक्सेना ने हिंदी भाषा के उत्थान को लेकर कविता पेश की। सुनाया- ‘अगर कथनी व करनी में हमारी एकता होती, तो अपनी मांये हिंदी राष्ट्रभाषा बन गई होती’। गोविंद तिवारी ने हास्य कविता ‘कि वो हमको मोहब्बत की पोथी पढ़ा रहे हैं, जो अपनी प्रेमिका से राखी बंधा रहे हैं’ पेशकर समां बांध दिया। नरैनी इंटर कालेज प्रधानाचार्य गोरेलाल गुप्त ने ‘तुलसी-तुलसी तुमने मानस लिखकर जन का कितना उपकार किया’ कविता पढ़ी।
आनंद किशोर लाल ने कविता पढ़ी- ‘ऐ वक्त तेरी नजाकत में हम इस कदर खोए, न जी भर के हंस सके-न जी भर के रोए’। सुधीर खरे (कमल), रामबिहारीलाल निगम, सुरेंद्र सिंह, राजाभइया गुप्त, ठाकुरदास शर्मा (सर्वोदय), संदीप शुक्ला, गजराज सेन, दीनदयाल सोनी आदि ने भी रचनाएं सुनाईं। अध्यक्षता चंद्रिका प्रसाद ‘कीर्ति’ ने की। संत कुमार, कमलेश श्रीवास्तव आदि उपस्थित रहे।
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