बाराबंकी। पॉलीथिन शहरी क्षेत्र के दुधारू जानवरों की जान ले रही है। कूड़े में फेंकी जाने वाली पॉलीथिन खाकर जानवर बीमार पड़ जाते हैं और धीरे-धीरे काल के गाल में समा जाते हैं। एक जानवर के पेट में 25 से 40 किलो तक पॉलीथिन व इसमें फंसा मलबा एकत्र हो जाता है जो हजम नहीं होता। मृत जानवरों के शव का डिस्पोजल करने के स्थान पर पॉलीथिन के ऐसे दर्जनों ढेर देखे जा सकते हैं जो जानवरों की मौत की वजह बने हैं। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए पालिका या प्रशासन स्तर से कभी कोई ठोस प्रयास भी नहीं किया गया। पॉलीथिन इंसान की दिनचर्या में इतना दखल कर चुकी है कि प्रतिबंध के बावजूद इसे चलन से बाहर नहीं कर पा रहा है। यह दुधारू जानवरों के लिए प्राणघातक साबित हो रही है। खासतौर पर शहरी क्षेत्र में घरों से पॉलीथिन में भरकर फेंके जाने वाले कूड़े इसका कारण बन रहे हैं। कूड़े में मिलने वाले खाद्य पदार्थ पॉलीथिन समेत जानवर खा जाते हैं लेकिन ये हजम नहीं कर पाते हैं। इससे वह बीमार पड़ जाते हैं और कुछ समय बाद उनकी मौत हो जाती है। औसतन शहरी क्षेत्र में प्रतिदिन तीन जानवर पॉलीथिन के कारण मौत का शिकार हो रहे हैं। जानवरों के शव का डिस्पोजल करने वाली समिति के स्थान पर जानवर के पेट से निकले पॉलीथिन के मलवे का नजारा उनकी दस्तान बयां करता है।