बरेली। मुस्लिम औरतों को ‘खुला’ लेने के लिए शौहर की रजामंदी को जरूरी बताने के उलमा के बयान पर आला हजरत हेल्पिंग सोसायटी की अध्यक्ष निदा खान ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि उलमा शरीयत की मनमानी व्याख्या कर रहे हैं। पहले उन्होंने तीन तलाक पर औरतों को उनके हक से महरूम किया, अब पुरुषों की पैरवी में औरतों को ‘खुला’ के अधिकार से भी वंचित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह बर्दाश्त से बाहर है। वह चांद मियां की बीवी को अब अदालत के जरिये तलाक दिलाएंगी।
गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर आतंकी हमले के आरोपी रहे चांद मियां की बीवी नगमा ने कुछ समय पहले ‘खुला’ के लिए उलमा से संपर्क किया था लेकिन उलमा ने उसे ‘खुला’ दिलाने से इंकार कर दिया था। इसके बाद नगमा शौहर चांद मियां से तलाक के लिए निदा के संपर्क में है। शनिवार को एक उलमा ने अपने बयान में कहा था कि औरतों को ‘खुला’ तभी मिल सकता है, जब शौहर इसके लिए रजामंद हो। निदा ने इस पर कहा है कि वह किसी एक मौलाना की बात नहीं मानेंगी बल्कि चांद मियां की बीवी को ‘खुला’ दिलाने के लिए दूसरे मौलानाओं से मिलेंगी। फिर भी मौलाना नहीं माने और औरतों को ‘खुला’ के अधिकार से वंचित रखा तो वह पीड़िता को कोर्ट से तलाक दिलाएंगी। जब कोर्ट तलाक दे देगा तो शरीयत से भी उसका तलाक होना माना जाएगा।
निदा का कहना है कि चांद मियां डेढ़ साल से नगमा के संपर्क में नहीं है। वह उसे कोई खर्च भी नहीं दे रहा। संविधान कहता है कि जब पति अपनी पत्नी को खर्च न दे और उसके संपर्क में न रहे तो पत्नी कोर्ट से तलाक ले सकती हे। शरीयत में भी प्रावधान है कि अगर शौहर पत्नी को तलाक न दे रहा हो तो वह ‘खुला’ मांग सकती है। मगर उलमा मनमानी करते हुए शरीयत की अलग ही व्याख्या कर रहे हैं। निदा ने कहा कि उनकी जानकारी में लखनऊ का एक मामला है, जिसमें एक मुस्लिम औरत ने अपने पति से उसकी इजाजत के बगैर ‘खुला’ लिया था।