बरेली। दिल्ली हाईवे और पीलीभीत बाईपास रोड के मुंशीनगर के नजदीक अवैध कालोनी निर्माण का मामला अभी निपट भी नहीं पाया था कि मिनी बाईपास चौराहे से कर्मचारी नगर रोड पर एक और अवैध कालोनी निर्माण का मामला सामने आ गया। यहां पहले एक-एक कर मकान बनाए गए फिर अवैध तरीके से कॉलोनी बनाई जा रही है। सपा से जुड़े कुछ नेता भी इस कॉलोनी में पार्टनर हैं। शहर के अंदर बीते दो दशक में 250 से ज्यादा अवैध कालोनियां बन गईं। इन अवैध कालोनियों ने बरेली का नक्शा ही बिगाड़कर रख दिया है। बीडीए अवैध कालोनियों का निर्माण रोकने में पूरी तरह नाकाम है।
किला नदी के किनारे खाली पड़ी जमीन पर अवैध कालोनी बसाने का काम बीते छह महीने से चल रहा है। बीडीए के अवर अभियंताओं की टीम इसी रोड और कालोनी से होकर कई बार गुजर चुकी है, लेकिन इस कालोनी का न तो बीडीए ने ले आउट चेक करने की जरूरत समझी, न ही यह पता लगाने की कि यह कालोनी कौन और कब से बना रहा है? किसी जागरूक नागरिक ने अमर उजाला को अवैध निर्माण की सूचना दी, जिसके बाद मौके पर जाकर देखा गया तो कालोनी में मकान बनते मिले। किला नदी किनारे की यह जमीन तीन या चार साल पहले खाली पड़ी थी। पहले कालोनाइजरों ने नदी के किनारे बाउंड्रीवाल उठाई। फिर एक-एक कर मकान बने। अब यहां गेट लगाकर पूरी कालोनी का निर्माण चल रहा है। कालोनी के अंदर शनिवार शाम चार बजे भी चार से पांच मकानों के निर्माण चल रहे थे। सूत्रों की मानें तो यह कालोनी बिना ले आउट पास कराए आठ पार्टनर मिलकर बना रहे हैं। कुछ लोगों ने इन कालोनाइजरों की देखादेखी व्यक्तिगत प्लाट खरीदकर भी मकान बना रखे हैं। कालोनी के बाहर मिले एक व्यक्ति ने नाम न छापने की गुजारिश पर बताया कि प्राधिकरण से नक्शा बिना मंजूर कराए एक कालोनाइजर (जिनका रेरा में पंजीकरण भी नहीं है) बने बनाए मकान बेच रहे हैं। यहां मकान की कीमत 40 लाख से लेकर 80 या 90 लाख तक बताई गई। कालोनी के बाहर भी कुछ निर्माण लोग व्यक्तिगत तरीके से अवैध करा रहे हैं, जिनकी संख्या छह या सात होगी। इनके नक्शे भी प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं है।
‘जिस नाम से बताया जा रहा है, मिनी बाईपास चौराहे से कर्मचारी नगर रोड पर उस नाम से किसी कालोनी का ले आउट बीडीए से स्वीकृत नहीं है। फिलहाल बीडीए की टीम भेजकर निर्माण चेक कराए जाएंगे। अवैध मिलने पर प्राधिकरण के नियमानुसार कार्रवाई होगी।’
- आशीष शिवपुरी, चीफ टाउन प्लानर बीडीए