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चौपुला ओवरब्रिज:

बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 03 Apr 2019 01:22 AM IST
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फोटो- टोनी जी
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चौपुला ओवरब्रिज

सुबह, दोपहर, शाम... जाम ही जाम

- अयूब खां रोड की एक साइड बंद होने से लग रहा जाम, बीस फुट चौड़े रास्ते में भी डिवाइडर

अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। चौपुला ओवरब्रिज के विस्तार की वजह से अयूब खां की ओर आने वाली रोड पर एक साइड कुछ दूर तक बंद कर दी गई है। जिसके चलते आवागमन केवल बीस फुट के रास्ते से ही हो रहा है। बस आदि बड़े वाहनों का रूट बदला गया है, लेकिन इस संकरे रास्ते के कारण सुबह से शाम तक जाम लग रहा है। माना जा रहा है कि एक से डेढ़ साल तक यह स्थिति रहेगी।
चौपुला से अयूब खां जाने वाले रास्ते पर दायीं साइड में ओवरब्रिज का पिलर बनाया जा रहा है। लिहाजा डिवाइडर के अगले कट तक यह रास्ता बंद करना पड़ा है। बायीं साइड के रास्ते की चौड़ाई करीब बीस फुट है। इसमें ट्रैफिक पुलिस ने अस्थायी डिवाइडर खड़े किए हुए हैं। इन्हीं के सहारे वाहनों का आवागमन किया जा रहा है। पहली दोनों साइड चालू होने पर तो जाम लगता ही था, अब रास्ता और संकरा होने से समस्या बढ़ गई है। सुबह से लेकर शाम तक जाम लगता है। हालांकि ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड की संख्या यहां बढ़ाई गई है, लेकिन फिर भी जाम लगता है।
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रोडवेज बसों की आवाजाही रोकी
ट्रकों की एंट्री इधर पहले से ही बंद है। अब ट्रैफिक पुलिस ने रोडवेज बसों की आवाजाही भी बंद कर दी है। टीआई जेएन अस्थाना ने बताया कि बदायूं दिशा में जाने वाली बसें चौकी चौराहे से निकल रही हैं। बदायूं से आने वाली बसें चौपुला चौराहे से सीधे चौकी चौराहे होकर रोडवेज स्टैंड भेजी जा रही हैं।

‘ओवरब्रिज बनने के बाद यहां अक्सर लगने वाला जाम काफी हद तक खत्म हो जाएगा। फिलहाल तो समस्या झेलनी ही पड़ेगी। चौपुला पर सिविल पुलिस को भी ट्रैफिक पुलिस की मदद करने को कहा गया है।’
- अभिनंदन सिंह, एसपी सिटी

राहगीरों की बात- फोटो

‘दिन में कई बार इधर से ऑटो लेकर निकलता हूं। अब समस्या ज्यादा हो गई है। अक्सर जाम मिलता है।’
- नीरज, कटघर

‘शहर में एक साथ कई जगह निर्माण कार्य शुरू किए गए हैं, जिससे व्यवस्था बिगड़ी है। ये न जाने कब पूरे होंगे।’
- ज्योति, सिटी स्टेशन कॉलोनी

‘मनमानी से काम शुरू किया गया है तो कम से कम आसपास का अतिक्रमण हटाकर प्रशासन को रास्ता चौड़ा करना चाहिए।’
- जयबाला, मढ़ीनाथ

‘दिन में इधर आकर फंस गए। अब तौबा कर ली। कितना ही पेट्रोल खत्म हो जाए पर दूसरे रास्ते से घूमकर ही जाएंगे।’
- गौरव, किला
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