पीलीभीत बाईपास पर बने 1250 वर्ग मीटर में स्पाइनल इंजरी सेंटर की ‘इंजरी’ को अब बड़े आपरेशन की जरूरत है। मरीजों की बदौलत यह सेंटर चल रहा है, नहीं तो इसमें ताला लगते देर नहीं लगेगी। एक दिन में 50 से 60 मरीज आते हैं, उनके ओपीडी पर्चे और इलाज के खर्च से ही यहां के कर्मचारियों का वेतन दिया जा रहा है।
आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. संतोष सरकारी सेवा से निवृत्त हो चुके हैं, इसलिए यहां बैठ जाते हैं। अगर वह छुट्टी ले लें तो अस्पताल भी बंद हो जाए। सेंटर के पास करीब एक लाख 50 हजार 20 रुपये ही जमा राशि है। इससे न वे उपकरण खरीद सकते हैं और न ही सुविधा दे सकते हैं।
फीस से चल रहा है सेंटर
सेंटर में वर्ष 2001 से 2015 तक 1,55,645 मरीज आए। इनसे 1,53,02,361 रुपये आय हुई। फीस से यहां के स्टॉफ को वेतन मिल रहा है। सेंटर के बाहर खाली जमीन पर डीएम के आदेश पर एटीएम लगाकर किराए से आय के स्रोत बढ़ाए गए। एक दुकान को भी किराए पर देने को कहा गया, लेकिन अभी तक ऐसा हो नहीं पाया। अब यहां कोई दो सरकारी विभाग भी खोलने की बात चल रही है। इसका कोई किराया नहीं मिलेगा। वर्ष 2016 में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने शहर के निर्भय सक्सेना के पत्र का संज्ञान लेते हुए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को पत्र लिखा था। उन्होंने सुझाव दिया था कि इस सेंटर को केंद्र सरकार की राज्य कर्मचारी बीमा निगम की योजना से संबद्ध किया जाए। हालांकि इस पर अभी तक कोई साफ जवाब नहीं आया है।
इसलिए अटका है मामला
उप्र स्पाइनल इंजरी सेंटर बरेली और रीजनल रिहेबिलटेशन सेंटर फार स्पाइनल इंजरी एंड अदर आर्थोपेडिक डिसेबिलिटीज को जिला अस्पताल में शुरू किया गया। जगह कम पड़ने पर भवन बनाने के लिए पांच एकड़ भूमि उपलब्ध कराने की मांग उप्र सरकार से की गई। ग्राम तुलापुर में जमीन मिली, कुछ जमीन एमपी तैय्यल द्वारा दान में दी गई। 2003 से सेंटर यहां शिफ्ट हो गया। वर्ष 2003 तक केंद्र सरकार ने 86 लाख रुपये दिए। वर्ष 2004 और 2005 में कोई धनराशि नहीं आई। सेंटर चलाना मुश्किल हो गया। वर्ष 2005-06 में रिकरिंग धनराशि 20 लाख रुपये मिली, लेकिन इसके बाद धनराशि प्रदेश सरकार को उपलब्ध करानी थी। प्रदेश सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया और केंद्र ने भी मदद करने से मना कर दिया। इटली सरकार ने उपकरणों के लिए 20 लाख की मदद की थी। मौजूदा समय में इसकी गर्वनिंग बॉडी विकलांग कल्याण विभाग है और कार्यकारी समिति के अध्यक्ष मंडलायुक्त हैं।
इन दरों पर मिल रहा है इलाज
ओपीडी पर्चा 100 रुपये में सात दिन
फिजियोथेरेपी 75 से 125 रुपये प्रतिदिन
एक्स रे 120 से 180 रुपये प्रति एक्सरे
पैथॉलजी 40 से 110 रुपये प्रति टेस्ट
आर्थोटिक्स 700 से 900 रुपये प्रति बेल्ट
भर्ती शुल्क 200 रुपये जनरल, 300 रुपये सेमी प्राइवेट, 550 रुपये प्राइवेट प्रति दिन (लेकिन मरीज भर्ती नहीं होते)
मौजूदा समय में स्टॉफ
एक आर्थोपेडिक सर्जन, पैथालॉजिस्ट, स्वागती, स्टेनो, लेखा लिपिक, फिजियोथेरेपिस्ट, नर्सिंग सहायक, नर्सिंग आर्डरली, लैब असिस्टेंट, शू मेकर, चार चतुर्थ श्रेणी, एक सुपरवाइजर माली, सफाई कर्मी और तीन सुरक्षा कर्मी।
इसकी है जरूरत
कर्मचारी, उन्नत उपकरण, डिजीटल एक्सरे, एमआरआई मशीन, पैरालिसिस वार्ड, आपरेशन के लिए उपकरण।
स्पाइनल इंजरी सेंटर तो अपनी कमाई से चल रहा है। डॉक्टर से लेकर कर्मचारियाें तक को वेतन यहीं से मिलता है। फिलहाल इस सेंटर में कुछ भी नया नहीं हो रहा है। - डॉ. केएस गुप्ता, निदेशक, इंजरी सेंटर
यहां मथुरा, आगरा और दिल्ली तक से मरीज आते हैं। कर्मचारियों को वेतन तो मिलता है, लेकिन यह बहुत कम है। कुछ लोग तो यहां से जाने के बाद दूसरा काम करते हैं। - डॉ. संतोष, आर्थोपेडिक सर्जन