बरेली। कड़ी मशक्कत के बाद एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शुरू हुआ एमफार्मा कोर्स विश्वविद्यालय की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। पिछले साल अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) की आपत्ति के बाद एमफार्मा में एडमिशन रोक दिए गए थे। इस बार भी एआईसीटीई ने एडमिशन को हरी झंडी नहीं दी है। यानी अगले सत्र में भी एमफार्मा के एडमिशन नहीं हो सकेंगे। विश्वविद्यालय ने ऐसे विभागों में शिक्षक भर लिए जहां जरूरत ही नहीं थी, लेकिन एमफार्मा के लिए प्रोफेसर नियुक्त नहीं किया। उसी वजह से कोर्स बंद हुआ।
फार्मेसी विभाग में दो साल पहले ही एमफार्मा कोर्स शुरू हुआ। एआईसीटीई के मानकों के अनुसार विभाग में प्रोफेसर होने चाहिए थे जबकि एसोसिएट और गेस्ट फैकल्टी के सहारे कोर्स चल रहा था। एआईसीटीई की टीम डीफार्मा का निरीक्षण करने आई थी। जब शिक्षकों की संख्या देखी तो डीफार्मा का आवेदन निरस्त कर दिया गया और दूसरी तरफ विश्वविद्यालय से जवाब तलब किया एमफार्मा में प्रोफेसर क्यों नहीं है। विश्वविद्यालय इसका जवाब नहीं दे पाया और एआईसीटीई ने एमफार्मा प्रवेश पर रोक लगा दी। उम्मीद थी कि शैक्षिक सत्र 2018-19 में विश्वविद्यालय प्रोफेसर नियुक्ति होगा और एक अच्छा कोर्स फिर से शुरू होगा। विश्वविद्यालय ने शिक्षा विभाग, एमबीए अन्य विभागों में शिक्षकों की भर्तियां, लेकिन फार्मेसी को छोड़ दिया। विश्वविद्यालय ने एआईसीटीई को एमफार्मा में प्रवेश के लिए दोबारा पत्र भेजा, लेकिन वहां से मना कर दिया। जब तक प्रोफेसर नियुक्त नहीं होगा तब तक एमफार्मा में एडमिशन नहीं होंगे। प्रोफेसर नियुक्त होना मुश्किल है, यानी अगले सत्र में भी एमफार्मा में प्रवेश होना मुश्किल है। विश्वविद्यालय में एमफार्मा की पढ़ाई करने की आस लगाए बैठे छात्रों को तगड़ा झटका लग सकता है।