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लेखा परीक्षक हुए लामबंद

Updated Tue, 13 Feb 2018 10:00 AM IST
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निदेशक पर रिटायर आडिटरों ने जड़े
गंभीर आरोप, वित्त मंत्री को ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
सेवानिवृत्त लेखा परीक्षक एसोसिएशन ने सूबे के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल को दिए ज्ञापन में निदेशक स्थानीय निधि लेखा परीक्षा पर गंभीर आरोप लगाते हुए प्रभावी कार्रवाई की गुहार लगाई है। ज्ञापन में कहा गया है कि निदेशक सालों पुराने एरियर भुगतान नहीं करा रहे हैं। ट्रांसफर-पोस्टिंग में भी खुला भ्रष्टाचार हो रहा है।
एसोसिएशन की ओर से वित्त मंत्री को दिए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि निदेशक रविंद्र तिवारी ने अरबों रुपये के घपलों की आडिट आपत्तियाें पर पर्दा डाल दिया है। इससे पिछली सरकारों में विभिन्न विभागों में हुए वित्तीय घोटालों का पर्दाफाश नहीं हो पा रहा है। एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा है कि पूर्व निदेशक भानु प्रताप ने करीब तीन अरब रुपये के घपलों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे, लेकिन मौजूदा निदेशक तिवारी ने इन पर्दा डाल दिया, सचिवालय से उन्हें संरक्षण मिल रहा है। एसोसिएशन नेताओं का कहना है कि निदेशक तिवारी हाईकोर्ट और सरकार तक के आदेश-निर्देश नहीं मानते। रिटायर लेखा परीक्षक अफसरों के पुराने वाद निस्तारित नहीं किए जा रहे हैं, न लंबित भुगतान हो रहे हैं। निदेशालय में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का पूरा कॉकस निदेशक की जानकारी में सक्रिय है।
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वर्जन: फोटो राजेश अग्रवाल
ज्ञापन में लगाए गए आरोपों का परीक्षण कराया जाएगा। आरोप सही पाए जाने पर निदेशक और अन्य भ्रष्ट अफसर बख्शें नहीं जाएंगे।
- राजेश अग्रवाल, वित्तमंत्री
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