बरेली। चार वर्षीय एकीकृत अध्यापक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) अगले साल से शुरू होगा। हालांकि इससे बीएड, बीटीसी, बीएलएड और टीचर एजूकेशन के अन्य कोर्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह कोर्स पहले की तरह ही चलेंगे। अभी तक भ्रम की स्थिति थी कि दो वर्षीय बीएड की जगह चार वर्षीय आईटीईपी कोर्स चलेगा। बाकी कोर्स बंद हो सकते हैैं। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि आईं राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की चेयरमैन और सीनियर आईएएस डॉ. सतबीर बेदी ने सभी चीजें स्पष्ट कर दीं। कहा कि इस बार चार वर्षीय कोर्स लागू नहीं हो सका, लेकिन 2020 में हर हाल में इसे शुरू किया जाएगा।
दरअसल इस बार चार वर्षीय आईटीईपी कोर्स शुरू होना था। जो छात्र बारहवीं के बाद शिक्षक बनना चाहते हैं वह इस कोर्स को कर सकते हैं। व्यवस्थाएं पूरी न होने के कारण कोर्स को अगले साल के लिए टाल दिया गया। डॉ. बेदी ने बताया कि जल्दबाजी में कोर्स शुरू करना ठीक नहीं। इसलिए अगले साल इसे हर हाल में लागू करना है। इसके लिए विशेषज्ञों की टीम लगाकर सारी तैयारियां कराई जा रही हैं। पाठ्यक्रम से लेकर पूरा ढांचा तैयार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस कोर्स से एनसीटीई के बाकी 16 प्रोग्राम पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बाकी कोर्स पहले की तरह ही संचालित होंगे। इस साल के आखिर से कॉलेजों को पंजीकरण देना शुरू कर दिया जाएगा। कोशिश है कि 2020 में आईटीईपी का पहला सेशन शुरू हो जाए।
बीएड कॉलेजों पर नकेल कसने की तैयारी
एनसीटीई की चेयरमैन डॉ. बेदी ने बीएड कॉलेजों पर नकेल कसने के भी संकेत दिए। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कॉलेज नियमित पढ़ाई को लेकर संजीदा नहीं हैं। नियमित क्लास नहीं लगतीं। यही कारण है कि योग्य शिक्षक नहीं निकल पाते। कहा कि शिक्षक और छात्रों को आत्मचिंतन करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट तौर पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर कहा कि इस तरह की परिस्थिति से निपटने के लिए एनसीटीई सख्त रुख अपनाने के मूड में है। वहीं विशेषज्ञों की माने तो एनसीईटी बीएड कॉलेजों में छात्रों की उपस्थिति बोयोमेट्रिक कर सकता है ताकि ऑनलाइन सत्यापन भी सके।