अगर आपने प्रचलित भारतीय मुद्रा दस रुपये का सिक्का लेने से इंकार किया तो जेल की हवा खानी पड़ सकती है। बैंक प्रबंधन ने कहा है कि भारतीय करेंसी लेने से मना करना जघन्य अपराध है। ऐसे मामले में लोग सीधे संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज करा सकते हैं।
एक बार फिर बाजार में दुकानदार दस रुपये के सिक्के लेने से इंकार करने लगे हैं। आए दिन विवाद हो रहे हैं। ऑटो चालकों से कहासुनी होने लगी है। अफवाह फैलाई जा रही है कि यह सिक्का बंद हो गया है। हकीकत में 10 रुपये का कोई भी सिक्का बंद नहीं हुआ है। सब्जी मंडी में इन सिक्कों का आदान-प्रदान बड़ी संख्या में हो रहा है। उधर, बैंकों ने कहा है कि दस रुपये का कोई सिक्का नकली नहीं है और न ही बंद किया गया है। इसे लेने से मना करने वालोें पर मुकदमा दर्ज हो सकता है।
दुकानदारों के पास सिक्कों के ढेर
दस रुपये का सिक्का भारी होता है, इसलिए ज्यादातर लोग इसे लेने से बचते हैं। बाजार में यह सिक्का दुकानदार आपस में ही ले और दे रहे हैं। वे सौ रुपये, पांच सौ रुपये और दस के सिक्कों के 20-20 की संख्या में पैकेट बनाकर आपस में ही आदान-प्रदान करते हैं। कुछ स्थानों पर एक और दो रुपये का सिक्का लेने से भी इंकार किया जा रहा है।
बाजार में मौजूद सभी सिक्के मान्य
बाजार में दस रुपये के दो प्रकार के सिक्के मौजूद हैं। एक पर रुपये का चिह्न अंकित है तो दूसरे पर दस रुपया लिखा है। लोग इस पर असली-नकली होने का भ्रम फैला रहे हैं। एसबीआई के मुख्य प्रबंधक सुनील शर्मा ने बताया कि भारतीय टकसाल से जारी सभी सिक्के वैध हैं। इन्हें लेने से इंकार करना जघन्य अपराध की श्रेणी में आता है।
इंकार करना पड़ सकता है भारी
भारतीय मुद्रा लेने से मना करना भारी पड़ सकता है। एसबीआई के वरिष्ठ अधिकारी आरके गौड़ बताते हैं कि इसकी लिखित शिकायत संबंधित थाने में दर्ज कराई जा सकती है, क्योंकि प्रचलित मुद्रा लेने से मना करना या इसका तिरस्कार करना आईपीसी की धारा 124 ए के तहत अपराध है। सिक्का न लेने वाले के खिलाफ इसी धारा में मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।