प्रदेश के विकास खंडों के स्वान केंद्रों पर तैनात 647 इंजीनियरों की भी नौकरी चली गई। बरेली में ग्यारह इंजीनियर हटाए गए हैं। अब स्वान केंद्रों को चलाने के लिए बीएसएनएल की मदद ली जाएगी। जिला मुख्यालय पर अब तक दो इंजीनियर तैनात रहते थे, लेकिन अब एक ही तैनात रहेगा।
प्रदेश से जिला, तहसील और विकास खंडों को स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) स्कीम के तहत इंटरनेट से जोड़ने के लिए स्वान केंद्र खोले गए थे। इसके लिए ब्लाकों तक बीएसएनएल ने लीज लाइन बिछाई है। करीब आठ साल पहले खोले गए स्वान केंद्रों को पहले चरण में चलाने की जिम्मेदारी एचसीएल को दी गई। इसके बाद ट्यूलिप टेलीकॉम कंपनी को केंद्रों के संचालन की सरकार ने जिम्मेदारी दी। इन दिनों विप्रो इंफोटेक स्वान केंद्रों का संचालन कर रही है। स्वान केंद्रों को चलाने के लिए प्रदेश के 70 जिला मुख्यालयों पर दो-दो इंजीनियरों की तैनाती की गई। जबकि 240 तहसील मुख्यालयों पर एक-एक इंजीनियर तैनात किया गया। इस तरह प्रदेश में कुल 971 इंजीनियर स्वान केंद्रों का संचालन कर रहे थे। उत्तर प्रदेश शासन के अनु सचिव हरीराम ने एनआईसी और सभी जिलों के डीएम को पत्र लिखकर कहा है कि अब स्वान केंद्रों पर 324 इंजीनियर ही काम करेंगे। पत्र मेें यह भी कहा गया है कि केंद्रों को सक्रिय बनाए रखने के लिए पहले ही सभी जिलों के डीएम को बता दिया गया है। अनु सचिव के इसी पत्र के साथ ब्लाकों के स्वान केंद्रों के इंजीनियरों की नौकरी चली गई। अचानक नौकरी जाने से इंजीनियरों के परिवार में मायूसी छा गई है। प्रदेश सरकार ने एक दिन पहले रोजगार सेवकों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं।
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इंजीनियर विप्रो कंपनी के कर्मचारी हैं। सरकार ने मैनपॉवर कम करने का फैसला किया है। इंजीनियरों का सीधे सरकार से कोई मतलब नहीं है। मैनपॉवर कम होने से कोई भी काम प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए ब्लाक के कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर तैयार करेंगे।
-मनोज शर्मा, टेक्निकल डायरेक्टर, एनआईसी