बरेली। योगी सरकार का हुक्म कि खेत में गन्ना खड़ा रहने तक चीनी मिलें चलती रहेंगी.. खरा उतरता नहीं दिख रहा है। बरेली के पांच चीनी मिलों में से तीन मिल संचालकों ने किसानों को पर्याप्त गन्ना न मिलने का नोटिस देते हुए गन्ने की खरीद बंद कर दी है। दो अन्य चीनी मिल संचालकों ने मई के पहले सप्ताह में मिलों को बंद करने का नोटिस दे दिया है। दूसरी ओर अभी किसानों को पूरा गन्ने का बकाया भुगतान भी नहीं किया गया है।
फरीदपुर की द्वारिकेश चीनी मिल, मीरगंज की जेके शुगर मिल और नवाबगंज की ओसवाल शुगर मिल संचालकों ने गन्ना न मिलने का हवाला देकर किसानों से गन्ने की खरीद कई दिन पहले चुपचाप बंद कर दी। चुनावी शोर में गन्ना विभाग के अफसर भी चीनी मिल बंद होने की बात को दबा गए। सेमीखेड़ा चीनी मिल के प्रबंधन ने 28 अप्रैल को नोटिस जारी कर कहा कि उसको पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है। इसलिए जिन किसानों का गन्ना खेत में खड़ा है, उनको पूरी पर्चियां जारी की जा रही हैं। ऐसी चीनी मिलें तीन मई से पहले अपनी पर्चियों पर पूरा गन्ना मिलों को पहुंचा दें। तीन मई के बाद गन्ने की खरीद नहीं होगी। यही स्थिति बहेड़ी के केसर शुगर मिल की है। केसर शुगर मिल ने भी 30 अप्रैल तक गन्ने की खरीद बंद करने का दूसरा नोटिस दे दिया है। संचालक चीनी मिल बंद करने का एक नोटिस पहले भी दे चुके हैं। मिल प्रबंधन का कहना है कि पर्याप्त गन्ने की खरीद न होने से मिल रोजाना आठ से नौ घंटे बंद करनी पड़ रही है। उधर, किसानों का कहना है कि अभी उनके खेतों में गन्ना खड़ा है। समय से पर्चियां न मिलने की वजह से गर्मी में गन्ना खेतों में सूख रहा है। किसान गन्ने को छोड़ पकी फसल गेहूं की कटाई में लग गए। इस वजह से भी गन्ना मिलों तक नहीं पहुंच पाया। तमाम किसानों ने कुछ गन्ना बीज की वजह से खेतों में रोक रखा है।
‘अभी केवल वही मिलें बंद हुई हैं, जहां गन्ना बिल्कुल नहीं मिल पा रहा है। जिन क्षेत्रों में गन्ना खेतों में खड़ा है, वहां तब तक मिलें चलती रहेंगी.. जब तक गन्ना खेतों में रहेगा। सेमीखेड़ा और बहेड़ी मिल प्रबंधन ने बंद करने का नोटिस दिया है, मगर गन्ना रहने तक वह भी चलती रहेंगी।’
- सत्येंद्र सिंह, उपायुक्त गन्ना बरेली मंडल