ननकूराम ने बताया कि 12 फरवरी को यह लाइन लगाई गई है। पहले यह लाइन पीतम और बद्रीप्रसाद नाम के व्यक्तियाें के खेत से जा रही थी, जो कि पचास साल से अधिक समय से थी। आरोप है कि गांव के ही तीन लोगाें ने जब यह खेत खरीदा तो उन्होंने यह लाइन हटवाकर मंदिर के ऊपर से नीम का पेड़ कटवाकर उसके ऊपर से निकाल दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ की पूजा की जाती है और यहीं डेलापीर महाराज का स्थल भी है। उन्होंने इस काम में विभागीय मिलीभगत का आरोप लगाया है और जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।