पादप का नाम है- गुले अनार, पत्तियां ही अनार जैसी हैं। इस पर सिर्फ फूल खिलते हैं। इन फूलों का चिकित्सीय प्रयोग मधुमेह और नेत्र विकारों को दूर करने के लिए किया जाता है। आईवीआरआई इज्जतनगर के कृषि मेला की कृषि उत्पाद प्रदर्शनी में इसे लेकर आए नवाबगंज के किसान महेंद्र कुमार गंगवार ने बताया कि दो साल पहले गुले अनार को बैंगलोर से लेकर आए थे। आज उनके पास इसके सौ से ज्यादा पौधे हैं। 20 से 25 साल तक हरे रहने वाले इस पौधे से साल भर में डेढ़ से दो किलो तक फूल हासिल होते हैं। औषधि मंडियों में फूल एक लाख से सवा लाख रुपये प्रति किलो बिकता है।
महेन्द्र ने बताया कि शरीर के किसी भी हिस्से से बहते खून को रोकने की क्षमता रखने वाले कैक्टस प्रजाति के खूनखराबा, थाईलैंड, बैंकांक में पाई जाने वाली बांस प्रजाति के वंशलोचन, ठंडे क्षेत्रों में पाया जाने वाला कांकड़ा सिंघी और सिर पर बाल उगाने की क्षमता रखने वाला चिरमिट भी उनके पास है। एमएससी और बीएड डिग्रीधारक महेंद्र बताते हैं कि 15 साल पहले नौकरी छोड़कर उन्होंने पैतृक गांव विशनपुर में 15 एकड़ भूमि पर औषधीय पौधों की खेती शुरू की थी। सबसे पहले सतावर की खेती की। महज तीन से चार साल में ही एक करोड़ रुपये की आय उससे हासिल की। इसके बाद ठान लिया कि अब औषधीय पौधों की खेती करनी हैं और दुर्लभ प्रजाति के औषधीय पौधों की खेती शुरू कर दी। अपनी भूमि कम पड़ी तो उन्होंने 10 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती आगे बढ़ाई। वह दुर्लभ पौधों की खोज में कर्नाटक, केरल, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़ भी जाते हैं। करीब 50 से ज्यादा औषधीय प्रजाति के पौधे उनकी पौधशाला में हैं। महेंद्र कहते हैं कि वह चाहते हैं कि हर किसान अपने खेत में औषधीय पौधे लगाए। इसके लिए वह नि:शुल्क पौधे उपलब्ध कराने के लिए भी तैयार हैं। इनकी खेती से किसान अच्छी आय हासिल कर सकते हैं।