शारदीय नवरात्र 21 सितंबर को गुरुवार से शुरू हो रहे हैं जो पूरे नौ दिन चलेंगे और सभी के लिए शुभ होंगे। कई विशेष योग बनने से देवी की पूजा इस बार मंगलकारी-कल्याणकारी होगी। देवी इस बार अपने भक्तों से मिलने झूले पर सवार होकर आ रही हैं, हालांकि यह स्थिति प्रजा में विग्रह पैदा करेगी।
ज्योतिष विशेषज्ञ आचार्य मुकेश मिश्रा ने बताया कि इस बार नवमी 29 और विजय दशमी 30 सितंबर में मनाई जाएगी। मां जब भी झूले पर सवार होकर आती हैं तो इस योग से प्रजा में आपसी मतभेद पैदा होते हैं। देवी का प्रस्थान मुर्गे पर होगा, यह योग भी जनता में व्याकुलता पैदा करेगा। उन्होंने बताया कि कलश की स्थापना के लिए तुला लग्न में सुबह 08:08 से 10:27 और अभिजित मुहूर्त सुबह 11:36 से दोपहर तक बीच कलश स्थापना ज्यादा शुभ रहेगा।
ऐसे करें कलश स्थापना
अपने घर की ईशान दिशा में मां की चौकी सजाएं। इस पर लाल वस्त्र बिछाकर पीले चावल या रोली से स्वस्तिक बनाएं। कलावे से लिपटी सुपारी गणेश जी की प्रतिमा मानकर स्वस्तिक पर स्थापित कर मां की मूर्ति स्थापना करें। इसके बाद मिट्टी या तांबे का कलश लेकर पानी भरें, उसमें गंगाजल डालें। इसके बाद हल्दी की गांठ, सुपारी, लौंग, इलायची, कमल गट्टा, दूब घास, सोना या चंादी का कुछ अंश भी डालें। कलश के गले में कलावा बांधकर मिट्टी में जौ मिलाकर स्थापित करें। पंच पल्लव से सजाकर कलश का पूजन करें। मिश्रा ने बताया कि नवरात्र में सभी दिन शुभ होते हैं, इसलिए गृह प्रवेश, नया कार्य, संपत्ति आदि की खरीद लाभकारी रहती है।