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संघर्षों की विरासत सहेजेगा पांचाल संग्रहालय

बरेली Updated Tue, 19 May 2015 01:20 AM IST
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 रुहेलखंड विश्वविद्यालय इस क्षेत्र में स्वतंत्रता संघर्ष की अमूल्य धरोहर को संजोने की दिशा में  महत्वपूर्ण प्रयास कर रहा है। मंडलभर के स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीरें और उनसे जुड़ी सामग्री को पांचाल संग्रहालय में प्रदर्शित किया जाएगा। इसकी एक अलग वीथिका बनेगी।
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‘सेंटर फार एक्सीलेंस’ के कोआर्डिनेटर प्रो. अभय सिंह ने बताया कि कई स्रोतों से 40 स्वतंत्रता सेनानियों से जुड़ी सामग्री एकत्रित की गई हैं। अभी तलाश जारी है। स्वतंत्रता सेनानियों के संबंधियों से कहा जा रहा है कि उनसे जुड़ी खास वस्तुएं यदि हों तो लाएं। उन्हें प्रदर्शित किया जाएगा। उम्मीद है कि दो महीने के अंदर वीथिका तैयार हो जाएगी। नई पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि अशफाक उल्ला और राम प्रसाद बिस्मिल का उनके जीवन में क्या योगदान है। इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय के संग्रहालय में अलग वीथिका बनाई जाएगी।
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बरेली के गांधी भी होंगे
आगरा। सौहार्द के प्रतीक के रूप में प्रसिद्ध फजलउर्रहमान की निशानी भी नई वीथिका में रखी जाएगी। डॉ. अभय ने बताया कि इन्हें बरेली के गांधी के नाम से भी जाना जाता है।  सामग्री जुटाने में मुश्किल हो रही है।
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...पर भूल गए वर्ल्ड म्यूजियम डे
ये अलग बात है कि पंचाल संग्रहालय में महत्वपूर्ण योजना पर काम हो रहा है। लेकिन 18 मई को वर्ल्ड म्यूजियम डे पर वहां रखे हजारों साल पुराने मिट्टी के बर्तन कह रहे थे कि उन्हें कोई पूछने वाला नहीं। करोड़ों की लागत से बनी इमारत में सन्नाटा था। आर्कियोलाजिस्ट अनूप मिश्र का कहना है कि टेराकोटा का यहां अच्छा संग्रह है। और भी महत्वपूर्ण ऐतिहासिक वस्तुएं हैं। पर टेक्निकल स्टाफ के न होने से म्यूजियम के संचालन में समस्या आ रही है।

एंटीक्विटी जुटाने का काम हो रहा है। इसमें लोगों का भी सहयोग भी मांगा जा रहा है। उनके पास कुछ हो तो वे दें। सितंबर अक्टूबर तक म्यूजियम का एक बेहतर रूप सामने आएगा। संग्रहालय में काम चलने की वजह से 18 मई को कोई प्रोग्राम नहीं रखा जा सका।
- प्रो. श्याम बिहारी लाल, विभागाध्यक्ष इतिहास एवं संस्कृति विभाग
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