जनरेटर चलाएंगे तो खर्चा निकालना होगा मुश्किल
स्वर्णकार दिनेश वर्मा के मुताबिक, सोने के दाम पहले ही डेढ़ लाख के पार हैं। डीजल की कीमत भी बढ़ती जा रही है। गहनों की मेकिंग अगर जनरेटर चलाकर होगी तो मुनाफा तेल में ही निकल जाएगा। कारीगरों को मेहनताना दे पाना भी कठिन होगा। गर्मी के चलते दिन में काम के बजाय देर रात तक ज्वेलरी पॉलिशिंग, डिजाइनिंग, फिनिशिंग का काम कर रहे हैं, ताकि ऑर्डर समय पर पूरे किए जा सकें।
धीमी पड़ रही काम की रफ्तार, नोकझोंक की नौबत
स्वर्णकार विशाल रस्तोगी के मुताबिक, बिजली गुल रहने से सुनारी काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालात यह हैं कि आभूषणों के ऑर्डर समय पर तैयार नहीं हो पा रहे हैं, जिससे स्वर्णकार और सराफा कारोबारियों के बीच नोकझोंक की नौबत आ रही है। ग्राहक तय तारीख पर ही ऑर्डर लेने पहुंचते हैं लेकिन उत्पादन प्रभावित होने से समय पर डिलीवरी मुश्किल हो रहा है।