बस्ती। स्वामी श्रद्धानंद पूर्व माध्यमिक विद्यालय नगर बाजार में आयोजित चरित्र निर्माण शिविर के चौथे दिन गुरुवार को बच्चों को योगासन और प्राणायाम का अभ्यास कराया गया। इसका आयोजन आर्य वीर दल बस्ती कर रहा है।
शिविर में गरुण ध्वज पांडेय ने भस्त्रिका, कपालभांति और अनुलोम-विलोम प्राणायाम करने का तरीका बताया। बताया कि लंबी और गहरी सांस लेना तथा छोड़ना भस्त्रिका प्राणायाम कहलाता है। सांस ढाई सेकेंड में लेना और ढाई सेकेंड में छोड़ना होता है। इससे सांस संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। कपालभांति से चेहरे पर चमक आती है। अनुलोम-विलोम से रक्त संचार ठीक होता है। इससे शरीर स्वस्थ होता है। व्यायाम सत्र में प्रशिक्षक देवव्रत आर्य ने आर्य वीरों को सूर्य नमस्कार के 12 आसनों का प्रशिक्षण दिया। नियुद्धम के प्रकार, सावधानियां और बचाव के तरीके सिखाए। एक साथ कई शत्रुओं से सामना करने का गुर सिखाते हुए उन्होंने बताया कि आर्य वीर का बल राष्ट्र रक्षा के लिए होता है। जब देश पर कोई विपत्ति आती है तो आर्य वीर अपने पराक्रम के द्वारा उसे समाप्त करता है। बालक-बालिकाओं ने इन क्रियाओं के अलावा इंडिया गेट, ऊंची मीनार,ऊंट चाल सहित विभिन्न स्तूप और आसनों का अभ्यास किया। बौद्धिक सत्र में आहार-विहार के बारे में बताते हुए कहा कि हमारे शरीर की संरचना ईश्वर ने शाकाहारी के रूप में बनाया है। मांसाहार मनुष्य का भोजन नहीं है। शाकाहार से हमारे भीतर दया, दान, समर्पण, करुणा और मैत्री आदि दैवीय गुणों का विकास होता है। जबकि मांसाहार से लोभ, लालच, क्रोध, ईर्ष्या आदि दानवीय गुणों का विकास होता है।
सुबह देर से उठना एवं रात्रि में देर तक जागने से कई तरह के रोग हमें घेर लेते हैं। इसलिए हमें सदैव उचित आहार-विहार का ध्यान रखना चाहिए।