बस्ती। राजस्व गांवों के समुचित विकास के लिए प्रदेश सरकार की ओर से लागू की गई डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना में भी माननीयों की दखल रहेगी। अधिकारियों की मानें तो उनके सूची पर ही गांवों का नाम फाइनल होगा। यही कारण है कि सर्वे व सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद भी अब तक गांवों के नामों की घोषणा नहीं की गई।
शासन ने डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना की शुरुआत की है। इसके तहत जिले में इस वित्तीय वर्ष में 25 गांवों का चयन किया जाना था। सबसे पहले इसके लिए पांच विभागों को सर्वे कार्य के लिए लगाया गया। उनकी रिपोर्ट आने के बाद इनकी क्रास चेकिंग के लिए 139 अफसरों को लगाया गया। ये वही अफसर थे, जिन्हाेंने पिछले दिनों ग्राम पंचायतों की खुली बैठक कराई थी। क्रास चेकिंग के बाद इन अफसरों ने अपनी रिपोर्ट डीएम और सीडीओ को सौंप दी। सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उन 25 गांवों के नामों की घोषणा अब तक नहीं की गई, जिन्हें इस योजना के तहत चयनित किया जाना है। ऐसे में तमाम प्रकार के सवाल खड़े होने लगे हैं।
अब बचे हैं सिर्फ आठ माह
डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के तहत चयनित सभी गांवों को 31 मार्च 2013 तक संतृप्त किया जाना है। ऐसे में चयन में हो रही देरी से योजनाएं प्रभावित होंगी। इस वित्तीय वर्ष में अब आठ माह ही शेष बचे हैं। ऐसे में समय से इनको संतृप्त कर पाना चुनौतीपूर्ण तो होगा ही साथ ही योजनाओं की गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त नहीं हो सकता है।
विधायक की संस्तुति पर होगा चयन!
प्रभारी डीएम राम अरज मौर्य ने बताया कि संभावना है कि विधायकों की संस्तुति के बाद ही डा. राम मनोहर लोहिया समग्र ग्राम विकास योजना के गांवों का नाम तय हो पाएगा। शासन ने इस बारे में कोई लिखित निर्देश नहीं मिला है मगर, इस बात की चर्चा है। इसी कारण गांवों के नामों का चयन करने में विलंब हो रहा है।