बस्ती। जिला अस्पताल में चालीस बेड के चिल्ड्रेन वार्ड में मरीजाें की भरमार है। हालत यह है कि वार्ड में मरीज बच्चों के लिए बेड ही कम पड़ गए हैं। काफी दिनों से यही हालात है। दो कमरों में पच्चीस बेडों पर तीन गुना मरीज भर्ती किए जाते हैं। मरीजों और तीमारदारों की भीड़ को देखकर एडी तथा सीएमओ ने कई बाद एसआईसी से एक अतिरिक्त कमरे का इंतजाम कर और बेड बढ़ाने का निर्देश दिया, लेकिन इस पर अब तक अमल नहीं हुआ।
चिल्ड्रेन वार्ड में तीन कमरे हैं। इसमें चालीस बेड लगाए गए हैं, जिन पर मरीजों को भर्ती किया जाता था। 2011 में इंसेफेलाइटिस के मरीजों की अधिक तादात को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एक कमरे में लगे पंद्रह बेड को जेई के मासूम मरीजों को भर्ती के नाम पर अलग कर दिया। इससे अन्य मरीजों को असुविधा होनी शुरू हो गई। दूसरी तरफ जेई के मरीजों को भी भर्ती न कर रेफर का खेल जारी रहा। पच्चीस बेडों पर आए दिन तीन से चार बीमार बच्चों को भर्ती कर इलाज किया जाता है। साथ ही तीमारदारों की भीड़ अलग से जुटी रहती है। पूर्व के अपर निदेशक डा. जीडी भाष्कर, डा. आईपी सिंह के बाद वर्तमान अपर निदेशक डा. सुभाष चंद्र ने भी वार्ड के निरीक्षण में अव्यवस्था देख एक अतिरिक्त कमरे का इंतजाम कर और बेड लगाने का निर्देश दिया। इसके अलावा सीएमओ डा. एसपी दोहरे ने भी प्रमुख अधीक्षक से इसकी व्यवस्था करने को कहा। बावजूद अब तक न तो कमरे का इंतजाम हुआ और न ही बेडाें की संख्या बढ़ी। इससे मासूमाें के इलाज में डॉक्टर और स्टाफ नर्सों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। प्रमुख अधीक्षक डा. पीके सिंह का कहना है कि वार्ड में भीड़ को देखते हुए बेडों की संख्या बढ़ाने के उपायों पर विचार चल रहा है। द्वितीय तल पर तीन कमरों में सामान भरा है। जैसे ही उसको अन्यत्र शिफ्ट कराने की व्यवस्था हो जाएगी, ऊपर के तीनों कमरों में भी मासूमों का इलाज प्रारंभ करा दिया जाएगा।