बस्ती। जिला अस्पताल में तैनात फिजिशियन डॉ. गेंदा सिंह ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर हेकड़ी दिखाई। अपने रसूख का हवाला भी दिया लेकिन अब जब शिकंजा कसने लगा तो कदम पीछे खींचने लगे हैं। जांच के लिए मांगी गई मूल डिग्र्री दिखाने में बहानेबाजी करने लगे हैं। जांच के लिए डिग्री न उपलब्ध कराने को डीएम ने गंभीरता से लिया है। एसआईसी का कहना है कि जैसे वे डिग्री उपलब्ध कराएंगे, तत्काल उसकी वैधता की जांच करा ली जाएगी।
मूल रूप से आजमगढ़ जिले के निवासी डॉ.गेंदा सिंह का पीएमएस में चयन होने के बाद बस्ती में तैनाती का आदेश शासन से 25 सितंबर को सीएमओ कार्यालय को मिला। उन्होंने अपनी ज्वाइनिंग के समय केजीएमयू लखनऊ से फरवरी 1998 की एमबीबीएस और गोरखपुर विश्वविद्यालय से 2002 में उत्तीर्ण एमडी मेडिसिन की डिग्री प्रस्तुत सीएमओ कार्यालय में प्रस्तुत की। अक्टूबर में सीएमओ ने उनको जिला अस्पताल में फिजिशियन पदस्थापित कर दिया। इस दौरान उनकी हरकतों को लेकर साथी डॉक्टरों को भी शक होने लगा। चैंबर में एक अन्य महिला को बिठाने की बात सामने आई। इस पर एतराज हुआ तो उन्होंने महिला को प्रशिक्षण देने का बहाना बनाया। इसी बीच दिसंबर के दूसरे पखवारे में परिवार के साथ नीली बत्ती लगी गाड़ी से पोस्टमार्टम करने जा पहुंचे। इसकी शिकायत किसी ने डीएम एस. मथुशालिनी से कर दी। प्रकरण की जांच के लिए उन्होंने एडी हेल्थ व सीएमओ को अधिकृत किया। सीएमओ ने जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक को उनके मूल प्रमाण पत्र मंगाकर उसकी सत्यता का परीक्षण कराने को कहा। प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके सिंह ने डॉ. गेंदा सिंह से अपने सभी प्रमाण पत्रों को मूल रूप में प्रस्तुत करने को कहा। लेकिन चार दिन बीतने के बाद भी उन्होंने प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया है। प्रमुख अधीक्षक का कहना है कि वे प्रमाणपत्र देने में आनाकानी कर रहे हैं। दूसरी तरफ फिजिशियन डॉ. गेंदा सिंह ने कहा कि वे कमीशन से चयनित हैं। उनके प्रमाणपत्राें की जांच के बाद ही शासन से तैनात किया गया है। बार-बार प्रमाण पत्र की जांच का कोई औचित्य नहीं है। फिर भी उन्हाेंने प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर दिया है।