एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

राजनीतिक शक्ति से होगा सामाजिक परिवर्तन: प्राचार्य

Basti Updated Mon, 21 Jan 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

गौर। आचार्य नरेंद्र देव पीजी कालेज बभनान के प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि सामाजिक परिवर्तन के लिए राजनीतिक शक्ति जरूरी है। डॉ. अंबेडकर ने दलितों से कहा था कि अगर अपना जीवन स्तर सुधारना है तो पहले राजनीतिक शक्ति अर्जित करें।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्राचार्य डॉ. विनोद कुमार पांडेय दलित विमर्श और भारतीय सामाजिक इतिहास का पुनर्पाठ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कहा कि दलितों का सब कुछ छीनने वाले उनका कल्याण नहीं कर सकते। उन्हें स्वयं का उत्थान करना होगा। कहा कि देश का सर्वांगीण विकास तब तक नही होगा, जब तक दलितों के सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक स्तर में गुणवत्ता मूलक सुधार नहीं आएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामगोपाल तिवारी ने की। उन्होंने कहा कि शाब्दिक दृष्टि से दलित का अर्थ दला गया अथवा पीसा गया, मर्दित, विनष्ट किया गया आदि शब्द से लगाया जाता है। भारतीय समाज का बुनियादी ढांचा कभी भी लोकतांत्रिक नहीं रहा है। देश में आज भी अनेक विसंगतियां हैं जो मानव समाज के विकास में बाधक बन रही हैं। इसे दूर करने की जिम्मेदारी युवाआें को लेनी होगी। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. प्रभाकर मिश्र ने कहा कि भारत धर्म प्रधान देश है। हम सब मनु और सतरूपा की संतान हैं। इसका आशय यह है कि हम सब आपस में भाई हैं। फिर हमने जाति-पांत के रूप में अपने भाई, बहनों, स्वजनों को क्यों बांट दिया? कहा कि सबसे बड़ा धर्म मानव धर्म है। यदि हरिजन के छू लेने से मंदिर का कल्याण नहीं तो यह कहूंगा कि मंदिर में बस पत्थर है, भगवान नहीं। संगोष्ठी का संचालन डॉ. सुशील कुमार शुक्ल ने किया। इस अवसर पर डॉ. सुरेंद्र पांडेय, डॉ. सत्यप्रकाश ओझा, डॉ. माला सिंह, रामअजोर पांडेय, डॉ. अनीता सिंह, डॉ. स्मिता पांडेय, डॉ. हरीराम, डॉ. जयकरन तिवारी, शोभनाथ पांडेय, डॉ. फूलनाथ, शिवकुमार मौर्य, उमेश कुमार, अर्जुन कुमार, डॉ. ममता तिवारी, डॉ. मिथिलेश कुमार तिवारी, डॉ. नीरज श्रीवास्तव, सुनीता पांडेय के अलावा बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक व छात्र-छात्राएं मौजूद रहीं।
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें