एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

नारद को भटकाव से बचाना चाहते हैं प्रभु

Basti Updated Thu, 14 Mar 2013 05:30 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

कुदरहा। झारखंडेश्वर धाम परसांव में श्रीरुद्र महायज्ञ एवं श्रीरामकथा के दूसरे दिन कथा व्यास साध्वी समीक्षा द्विवेदी ने कहा कि काम, क्रोध और लोभ मानव के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

कथा को आगे बढ़ाते हुए साध्वी समीक्षा द्विवेदी ने बुधवार को नारद मोह की कथा सुनाई। कहा कि नारद पर काम ने जब अपना प्रभाव दिखाया तो वह ब्रह्मचारी होने के बावजूद नारी के लिए परेशान हो गए। ब्रह्मर्षि नारद का मोह देख भगवान श्रीहरि भी चिंतित हो उठे। नारद ने भगवान विष्णु से सुंदर तन मांगा, जिससे उनका विवाह हो सके। भगवान विष्णु ने उन्हें चेहरा छोड़ शेष काया सुंदर बना दी, मगर चेहरा बंदर का दे दिया। नारद को इस बात का पता नहीं था। ऐसे में वे अपने आप को सबसे सुंदर मानते हुए स्वयंवर में सुंदरी के आगे कूदते रहे। मगर जब उन्हें उपेक्षा मिली तो उन्हें अपने चेहरे का ज्ञान हुआ। वह इतने नाराज हुए कि उन्होंने भगवान विष्णु का शाप दे दिया। बाद में श्रीहरि ने उन्हें समझाया। साध्वी ने कहा कि महर्षि नारद को भगवान विष्णु भटकाव से बचाना चाहते थे। कामदेव के प्रभाव से बचाने के लिए उन्हें नारद का चेहरा बंदर जैसा बनाना पड़ा।
दूसरे दिन के मुख्य यजमान रामकल्याण सिंह रहे। इस मौके पर संरक्षक महंत पाल, अध्यक्ष उग्रसेन पाल, संजीव सिंह, रामशंर पाल, रामसूरत यादव, भोला तिवारी, संतोष पाल, पप्पू पांडेय, सुशील मिश्र आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें