बस्ती। एईएस/जेई पर प्रभावी नियंत्रण व उनकी रोकथाम के लिए शुक्रवार को अंतर्विभागीय एडवोकेसी कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें रोग के लक्षण और रोकथाम के उपायों के बारे में बताया गया।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर के बालाजी ने कहा कि एईएस और जेई पर प्रभावी रोकथाम के लिए लोगाें को जागरूक करने की जरूरत है। गांवों में साफ-सफाई के पर्याप्त इंतजाम कर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रबंध किए जाएं। साथ ही लोगों को सफाई के महत्व से अवगत कराने के लिए सरकारी और निजी स्तर पर प्रयास होना चाहिए। सीएमओ डॉ. एसपी दोहरे ने कहा कि मस्तिष्क ज्वर का अगस्त से नवंबर तक अधिक प्रसार होता है। यह मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। हम अपने आसपास के वातावरण की सफाई व साफ पानी का प्रयोग कर बीमारियाें से बच सकते हैं। जल निगम के अवर अभियंता प्रदीप कुमार चौरसिया ने स्वच्छ पानी पर ज्यादा जोर दिया। कहा कि गांव के लोगों को यथासंभव इंडिया मार्क-टू हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे डायरिया आदि बीमारियों से बचा जा सकता है। बताया कि आंकड़ों के अनुसार, भारत में 0-1 साल के बच्चों में प्रति एक हजार में से 60 की डायरिया से मौत हो जाती है। जबकि यूपी में यह दर 70 से अधिक है। इसके अलावा 0-5 साल की उम्र के बीच इस रोग से बच्चाें की मौत का प्रतिशत देश में 75 प्रति हजार और यूपी में 90 प्रति हजार है। अर्थात 70 बच्चे अपना पहला जन्मदिन व 90 बच्चे अपना पांचवां जन्मदिन नहीं मना पाते। कहा कि अब जिले में बायोलाजिकल लैब के माध्यम से पानी की शुद्धता का परीक्षण हो सकेगा। डीएमओ डॉ. आईएम अंसारी ने कार्यशाला के आयोजन की महत्ता पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर बीएसए मनभरन राम, महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. सरोजबाला, ओंकार नाथ उपाध्याय, डॉ. अभिमन, यूनीसेफ के आलोक राय, डिप्टी सीएमओ डॉ. सीएल कन्नौजिया आदि लोग उपस्थित रहे।
आननफानन हुआ आयोजन
किसी प्रकार की पूर्व तैयारी न किए जाने से आनन फानन में कार्यशाला के आयोजन से अपेक्षित लोग नही पहुंच सके। सिर्र्फ स्थानीय चिकित्साधिकारियों व एनजीओ के दो-चार लोगों को छोड़कर कोई भी आयोजन में नहीं पहुंचा। यहां तक कि एसपीएम विशेषज्ञ के रूप में गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कालेज के डॉ. डीके श्रीवास्तव भी कार्यशाला में मौजूद नहीं रहे। साथ ही होमवर्क न किए जाने से लोगों ने कोई सवाल जवाब भी नहीं किया।