कप्तानगंज। कस्बे में नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पहले दिन कथावाचक ने सत् चित् आनंद अर्थात सच्चिदानंद भगवान की कथा सुनाई। मुक्तामणि ने कहा हमारे भगवान सत् चित और आनंद स्वरूप हैं। सच्चिदानंद कह देने से ही हमारे दैहिक, दैविक, भौतिक तीनों ताप दूर हो जाते हैं।
मुक्तामणि ने कहा कि जो बुद्धिमान पुरुष वह चाहे निष्काम हो या कामनाओं से युक्त हो अथवा मोक्ष चाहता हो, उसे पुरुषोत्तम भगवान की आराधना करनी चाहिए। केवल साधन के रूप में नहीं जब भक्ति स्वाभाव सिद्ध होे जाती है तब वह अद्वेष आदि सद्गुणों के समान तत्वज्ञान के अनंतर भी जीवनमुक्त महापुरुष के हृदय में रहती है। कहा कि श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि मुक्त तो अनेक जीव होते हैं। मगर उनमें नारायण परायण कोई-कोई होते हैं। भक्ति नवीन वासनाओं और दोषाें को आने नहीं देती। संसार में होने वाले राग-द्वेष को भक्ति काटती है एवं संचित कर्मराशि को भगवान की और उन्मुख करती है। कथा के अंत में आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर राममणि शास्त्री, धीरज शास्त्री, विमलजी, दिनेश मिश्र, सुरेंद्र पांडेय, चंद्र शेखर यादव, जयकरन गुप्ता, सोनू सिंह, बबलू, श्याम सोनी आदि लोग मौजूद रहे।