बस्ती। जिले के अधिकतर लोग जान जोखिम में डालकर लाल निशान लगे हैंडपंपों का पानी पीने के लिए मजबूर हैं। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग प्रदूषित जल का सेवन कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण इस्तेमाल के लिए वर्जित हैंडपंपों की जगह पेयजल के दूसरे इंतजाम अभी तक नहीं किए गए।
जेई/एईएस से निपटने के लिए शासन की ओर से पूर्वांचल के जिलों के लिए एक विशेष योजना पिछले साल तैयार की गई थी। इनमें सॉलिड एंड वेस्ट मैनेजमेंट के साथ ही कई योजनाएं प्रस्तावित थीं। इसके लिए तत्कालीन डीएम एस मथुशालिनी ने सभी बीडीओ को निर्देश भी जारी किया था। सॉलिड एंड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत हैंडपंप से निकलने वाली वेस्टेज वाटर के लिए पक्की नाली और सोख्ते का निर्माण कराया जाना था। कूड़ा-कचरा प्रबंधन के लिए ग्राम पंचायतों में उचित व्यवस्था की भी बात कही गई थी। बरसात में तालाबों, नालों और नालियों में मच्छरों के प्रकोप से बचने के लिए गैमक्सीन के छिड़काव की भी योजना थी। इंडिया मार्क हैंडपंप-टू से अप्रयुक्त जल का उचित लंबाई की नालियों के माध्यम से निस्तारण किया जाना था। इस कड़ी में सबसे पहले शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में उथले हैंडपंपों को चिह्नित कराया गया, जिनसे प्रदूषित जल की आपूर्ति हो रही थी। इन सभी हैंडपंपों पर लाल निशान लगवाए गए। लोगों को लाल निशान वाले हैंडपंपों के पानी पीने से मना किया गया। मगर शुद्ध पेयजल की व्यवस्था कैसे हो, इसके बारे में कोई व्यवस्था नहीं की गई। जेई/एईएस प्रभावित इस जिले में शासन की ओर से कई योजनाओं के लालीपॉप दिखाए गए मगर अब तक किसी भी योजना पर अमल नहीं हो पाया। न तो लाल निशान वाले हैंडपंप हटे और न ही पेयजल और स्वच्छता समितियां क्रियाशील हो पाईं। पक्की नाली और सोख्ते का निर्माण भी नहीं कराया जा सका। सॉलिड एंड वेस्ट मैनेजमेंट स्कीम भी हवाहवाई साबित हुई।
15 मई तक गाइडलाइन मिलने की उम्मीद :डीपीआरओ
डीपीआरओ समरजीत यादव कहते हैं कि जेई एईएस से निपटने की पंचायतीराज विभाग ने बढ़िया योजना तैयार की थी। अचानक निदेशक ने इसके अमल पर रोक लगा दी। उसके बाद से अब तक कोई गाइडलाइन निदेशालय से नहीं मिली। उम्मीद है 15 मई तक गाइडलाइन आ जाएगी। जैसे ही गाइड लाइन मिलेगी काम शुरू करा दिए जाएंगे। विभाग के पास धन की कमी नहीं है। जहां तक लाल निशान वाले उथले हैंडपंपाें के स्थान पर नए हैंडपंपों की बात है तो यह विषय जल निगम का है।
नहीं मिला कोई निर्देश:एक्सईएन
जल निगम के एक्सईएन पीएस सिंह का कहना है कि शासन से इंडिया मार्क टू हैंडपंपों का लक्ष्य निर्धारित होता है। उसी के अनुरूप वे लगाए जाते हैं। रही बात लाल निशान वाले हैंडपंपों के स्थान पर नये इंडिया मार्क हैंडपंप की तो उन्हें ऐसा कोई निर्देश नहीं मिला, जिसमें कहा गया हो कि लाल निशान वाले हैंडपंपों के स्थान पर इंडिया मार्क हैंडपंपों की स्थापना की जाए।
ऐसे करना था लोगों को जागरूक
परिषदीय स्कूलों/आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता के प्रति जागरूकता अभियान।
स्कूली बच्चों को लेकर ग्राम पंचायतों में प्रभातफेरी का आयोजन।
ग्राम पंचायतों की पेयजल और स्वच्छता समितियों को जागरूक करना।
ग्राम पंचायतों में लगे छोटे(उथले) हैंडपंपों को लाल रंग से चिह्नित किया जाना।
स्कूलों/आंगनबाड़ी शौचालयों की नियमित साफ-सफाई व्यवस्था सुनिश्चित कराना।