बस्ती। टोल प्लाजा के अनुबंध में 21.50 करोड़ रुपये के स्टांप की चोरी के मामले में जिलाधिकारी न्यायालय ने फर्म को नोटिस जारी किया है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक को नोटिस तामिल कराने को कहा गया है। कोर्ट ने फर्म को 28 नवंबर तक उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के आदेश दिए हैं। निर्धारित समय पर उपस्थित न होने पर एक तरफा फैसला करने की बात कही गई है।
एनएचएआई ने अयोध्या से सहजनवां के बीच पड़ने वाले सदर तहसील के बड़ेबन और हर्रैया तहसील के चौकड़ी में स्थित टोल प्लाजा से टोल टैक्स वसूली के लिए पांच मार्च 2013 को एसएमएस टोल प्राइवेट लिमिटेड नागपुर से नौ वर्षों के लिए अनुबंध किया। इसके मुताबिक कंपनी को प्रति वर्ष 79.02 करोड़ रुपये प्राधिकरण को देना होगा। इस प्रकार नौ साल के भीतर कंपनी को कुल 1075 करोड़ रुपये अदा करना है। साथ ही बढ़ोतरी के रूप में कंपनी को प्रति वर्ष 10 फीसदी की धनराशि अतिरिक्त जमा करनी होगी। अनुबंध के तहत कंपनी को रोड का रख-रखाव भी करना है। एआईजी स्टांप अशोक कुमार तिवारी ने जब अनुबंध की जांच की तो उसमें 21.50 करोड़ रुपये के स्टांप की कमी पाई गई। अनुबंध मात्र सौ रुपये के स्टांप पर करा लिया गया है। एआईजी ने इस मामले में कंपनी के विरुद्ध 21.50 करोड़ रुपये के स्टांप चोरी के आरोप में न्यायालय डीएम के यहां स्टांप वाद दाखिल करा दिया।
10 गुना लग सकता है अर्थदंड
13 नवंबर को जारी नोटिस में कहा गया है कि अगर 28 नवंबर को कंपनी के प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुए तो यह मान लिया जाएगा कि कंपनी को इस मामले में कुछ भी नहीं कहना है। उसके बाद कंपनी के विरुद्ध एकतरफा कार्रवाई कर दी जाएगी। कंपनी से ब्याज सहित शेष स्टांप शुल्क और अतिरिक्त अर्थदंड भू-राजस्व बकाए की भांति वसूली की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। अर्थदंड दस गुना तक हो सकता है।