बस्ती। राष्ट्रीय साक्षरता मिशन को तब तक चलाये जाने की जरूरत है जब तक देश प्रदेश का अंतिम व्यक्ति साक्षर नहीं हो जाता। लगातार प्रयास के बाद साक्षरता दर में वृद्धि हुई है किन्तु इसे और बढ़ाने के लिये जन सहयोग की आवश्यकता है। यह विचार जिलाधिकारी अनिल कुमार दमेले ने व्यक्त किया। वे दुबौलिया विकास खण्ड के नचना गांव के प्राथमिक विद्यालय पर रोटरी क्लब द्वारा आयोजित साक्षरता गोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित कर रहे थे।
जिलाधिकारी ने शिक्षित युवाओं को आवाहन किया कि वे स्वेच्छा से यह प्रयास करें कि उनके गांव और आस पास के क्षेत्रों में कोई निरक्षर न रहने पाये। विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध कवि अष्टभुजा शुक्ल ने बिम्बों के द्वारा अनेक प्रसंगाें का उद्धरण देते हुये कहा कि शब्द ब्रह्म है और इसकी साधना का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति को मिलना चाहिये। शब्द की सत्ता संसार के सभी ताकतों से शक्तिशाली है। रोटरी क्लब संरक्षक डॉक्टर रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि राष्ट्रीय साक्षरता मिशन की शुरूआत 1988 में इस इरादे से की गई थी कि 15 से 35 आयु वर्ग में निरक्षर लोगों को सन् 2007 तक 75 प्रतिशत काम चलाऊ साक्षर बना दिया जाएगा और इस स्तर को कायम रखा जाएगा। यह मिशन स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों के जरिए लोगों को एकजुट करने और साक्षरता को सामाजिक शिक्षा और जागरूकता के व्यापक कार्यक्रम में शामिल करने के उपायों पर निर्भर था। यदि प्रत्येक व्यक्ति एक व्यक्ति को शिक्षित करने का संकल्प ले निरक्षरता को समाप्त किया जा सकता है।
गोष्ठी को विवेकानन्द मिश्र, उमाशंकर पटवा, रोटरी क्लब अध्यक्ष सुरेश बावा आदि ने संबोधित करते हुये साक्षरता के महत्व पर प्रकाश डाला। आयोजक कैलाश दूबे ने अतिथियों का स्वागत करते हुये कहा कि साक्षरता का लक्ष्य प्राप्त करने के लिये सामूहिक प्रयास आवश्यक है। गोष्ठी का संचालन करते हुये योगेश शुक्ल ने साक्षरता के इतिहास एवं वर्तमान चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। नचना गांव में आयोजित साक्षरता पर केन्द्रित संगोष्ठी के दौरान रोटरी क्लब के सचिव हिमांशु सिंह, शैलेन्द्र कुमार सिंह, तनवीर आलम, ग्राम प्रधान रामकिशुन, इन्द्र बहादुर सिंह, रीना बाबा आदि मौजूद रहे।