बस्ती। खेत मजदूर यूनियन की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि देश में आज भी ग्रामीण मजदूरों को शहर के बाजारों में खड़े होकर अपने श्रम की बोली लगानी पड़ रही है। ग्रामीण मजदूर सबसे ज्यादा खराब स्थिति में हैं। मनरेगा के तहत श्रमिकों को गारंटेड अवधि का भी काम नहीं मिल रहा है। वे सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस में पत्रकारों से मुखातिब थीं। सुभाषिनी ने कहा कि शहरी उद्योग एवं रोजगार ग्रामीण मजदूरों के समायोजन में अक्षम दिख रहे हैं।
महिलाओं के उत्पीड़न की चर्चा में उन्होंने कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं, जमीनी सच्चाई यह है कि आज भी गांव में महिलाएं शौच के लिए बाहर जाती हैं। ज्यादातर उत्पीड़न के मामलों में यह खास कारण बनकर सामने आता है। इसके साथ ही अशिक्षा, असमानता, आर्थिक पिछड़ापन और ऊंची जातियों की सोच महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचार के लिए जिम्मेदार है। खाद्य सुरक्षा कानून के सवाल पर सुभाषिनी ने कहा कि इस योजना के तहत 76 फीसदी आबादी को 2 से 3 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से अनाज दिया जाना प्रस्तावित है। राज्य सरकारों ने अभी तक इसे लागू करने में कोई रुचि नहीं लीं। केन्द्र की ओर से भी कोई प्रभावी पहल न किया जाना संदेह पैदा करता है कि कहीं योजना को बंद करने की साजिश तो नहीं चल रही हैं। केरल में 80 फीसदी आबादी बीपीएल कार्डधारक है। तमिलनाडु में 20 से 25 किलोग्राम राशन सभी को मिलता है। तुलनात्मक अध्ययन में उत्तर प्रदेश में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं। यहां सबसे ज्यादा गरीब हैं, किंतु बीपीएल कार्डधारक सबसे कम यहीं हैं।
यूपी के राजनीतिक हालात पर उन्हाेंने कहा कि यहां तो लोग जाति धर्म के पचड़े में फंसे हैं। विकास का मुद्दा सिर्फ सत्ता हासिल करने के काम आता है। पूर्व सांसद ने यह भी कहा कि 25 सितंबर को बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार, महिला उत्पीड़न सहित कई मुद्दों को लेकर व्यापक प्रदर्शन का कार्यक्रम है। इसके माध्यम से वे जनता की आवाज को सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगी। पत्रकार वार्ता में वीरेंद्र मिश्रा, केके तिवारी, सतीश सिंह आदि मौजूद रहे।