श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी अर्थात नागपंचमी जिले भर में परंपरा, श्रद्धा और विश्वास के साथ रविवार को मनाई गई। दूध दही और शहद से मंदिरों में नाग देवता का अभिषेक किया गया। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और नाग देवता दोनो की आराधना की। वहीं जगह-जगह कुश्ती, कबड्डी और अन्य खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। कई जगहों पर आल्हा का गायन भी हुआ।
नाग पंचमी की तैयारी शनिवार से ही शुरू हो गई थी। मंदिरों के साथ ही घरों में भी लोगों ने साफ-सफाई का कार्य शुरू कर दिया था। रविवार की सुबह गांवों में घर की महिलाओं ने दीवारों पर सांप की आकृति बनाकर पूजा की तो कुछ लोगों ने मंदिरों में जाकर शिव के गले का हार नाग देवता की विधि विधान से पूजा अर्चना की। वहीं कुछ लोगों ने नागों को दूध पिलाकर उनका दर्शन लाभ किया।
पंडित प्रेमचंद्र उपाध्याय ने बताया कि नागपंचमी पर सिद्घि योग, सर्वार्थ सिद्घि और अमृत सिद्घि योग के विद्यमान रहने से इस पर्व का महत्व और बढ़ गया। इस कारण लोगों ने काल सर्प योग शांति के लिए अनुष्ठान भी करवाए। इस बार नागपंचमी किए जाने वाले धार्मिक अनुष्ठान विशेष फल देने वाला है।
नागपंचमी पर एक ओर जहां परिवार के बड़े सदस्यों ने नाग देवता की पूजा आराधना की वहीं छोटे बच्चों ने ताल, पोखरों, नदी आदि के किनारे जाकर बहनों और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ गुड़िया पीटकर नागपंचमी का पर्व मनाया। गुड़िया पीटने वाले स्थानों पर तमाम दुकानें लगी थी जिन पर मिठाई, चाट पकौड़े, खिलौने आदि बेचे जा रहे थे। बस्ती शहर में कटेश्वर पार्क, मूड़घाट आदि स्थानों पर मेले लगे।
सोनहा में नागपंचमी पर सल्टौवा गोपालपुर चौकवा में मेला का आयोजन हुआ। जिसमें भगवान शिव की झांकी निकाली गई। मेले में लोगों ने परम्परागत तरीके से कजरी गीत, अल्हा गायन किया। हरदेव क्षेत्र के करीम नगर, भिरिया बाजार, रेहार जंगल, पंचमोहनी, बस्थानवा, कोठली, सोनहा, बढ़या, कानेथू, हसनापुर, लेदवा आदि गांवो में नागपंचमी की धूम रही। दुबौलिया क्षेत्र में नागपंचमी के अवसर पर मेला व कबड्डी खेल का आयोजन हुआ। क्षेत्र के नयकापार, विशेषरगंज, खुशहालगंज, चिलमा बाजार, डेईडीहा बाजार, डिगरापुर सहित कई गांवों में नागपंचमी पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन हुआ।