ज्ञानपुर। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय से ड्राइविंग लाइसेंस के रूप में जारी हो रहे स्मार्ट कार्ड में खामियां ही खामियां मिल रही हैं। इसे दूर करने के लिए कोई प्रयास भी नहीं किया जा रहा है। पुराना डीएल जमा कर स्मार्ट कार्ड लेने वालों की तो और भी फजीहत हो रही है। उनका डीएल नंबर ही गलत कर दिया गया है। अब उन्हीं से दुबारा पैसा जमा कर दूसरा कार्ड बनवाने का दबाव डाला जा रहा है। इससे सैकड़ों आवेदकों को तगड़ा झटका लगा है।
शासन के निर्देश पर स्मार्ट कार्ड के रूप में ड्राइविंग लाइसेंस जारी किया जा रहा है। इसके लिए अलग से कंप्यूटर कक्ष स्थापित किया गया है और अनुबंध करने वाले कंपनी के कर्मचारी इसमें तैनात किए गए हैं। जिन कर्मचारियों को यहां तैनात किया गया है उन्हें पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं मिला है। साथ ही जो कंप्यूटर और साफ्टवेयर हैं उनमें तमाम खामियां हैं। इसके चलते डीएल का सही नंबर अंकित नहीं हो पा रहा है। पुराना डीएल जमा कर स्मार्ट कार्ड लेने वालों का पूरा डीएल नंबर कार्ड पर अंकित नहीं हो पा रहा है। जिस अल्फा बेटिकल नंबर पर कार्ड जारी होना चाहिए वह नहीं हो रहा है। साथ ही डीएल नंबर में जहां अंग्रेजी के कोई शब्द हैं वह नहीं प्रिंट हो पा रहा है। ऐसे में डीएल का सत्यापन होने पर वह फर्जी मिलेगा। एक सौ से अधिक लोगों को गलत डीएल नंबर का स्मार्ट कार्ड जारी कर दिया गया है। इसमें एआरटीओ कार्यालय के भी कुछ कर्मचारी शामिल हैं। जिन लोगों का स्मार्ट कार्ड गलत नंबर पर जारी हुआ है उन्हीं से अब दुबारा पैसा जमा कर फिर से आवेदन करने का दबाव कर्मचारियों के द्वारा बनाया जा रहा है। इससे आवेदकों में काफी आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में आरटीओ अमिताभ चतुर्वेदी का कहना है कि कई लोगों की इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं। स्मार्ट कार्ड बनाने वाले अनुंबंधित कंपनी के कर्मचारी ठीक तरह से काम नहीं कर पा रहे हैं। इनके खिलाफ शासन को लिखा जाएगा।