सीतामढ़ी/कठारी/ऊंज। जिले की माटी ने एक बार फिर प्रतिभाओं की बेहद होनहार फसल उपजाई है। देश की सबसे प्रतिष्ठित भारतीय प्रशासनिक सेवा की परीक्षा में तीन मेधावियों ने अपना स्थान बनाकर जिले का नाम रोशन किया है। सीतामढ़ी इलाके के भभौरी गांव निवासी हरीश पांडेय ने आईएएस की परीक्षा में 195वीं रैंक हासिल की है, जबकि कठारी इलाके के सहसेपुर गांव निवासी योगीश मिश्रा ने 405वीं रैंक प्राप्त की है। अभोली क्षेत्र के सरायभावसिंह गांव निवासी प्रदीप मिश्रा ने 633वीं रैंक हासिल की है।
सीतामढ़ी के कोनिया क्षेत्र के एक छोटे से गांव के रहने वाले अशोक पांडेय के पुत्र हरीश शुरू से ही प्रतिभावान रहे। मैट्रिक में 90 फीसदी और आंध्रा बोर्ड से इंटरमीडिएट में 94.3 प्रतिशत अंक हासिल करन के बाद 2007 में एमएलएनआर से 10 में से 8.5 अंक के साथ इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। यहीं से उनका इंडियन ऑयल में कैंपस सेलेक्शन हुआ। वर्तमान में वह इंडियन ऑयल के एलपीजी प्लांट बंगलूरू में असिस्टेंट मैनेजर के पद पर काम कर रहे हैं। जॉब के दौरान आईएएस की तैयारी की और दूसरे प्रयास में 195वीं रैंक हासिल कर ली। फोन पर बंगलूरू से हरीश ने बताया कि पहले प्रयास में वह इंटरव्यू तक पहुंचे थे। पिता अशोक कुमार पांडेय का छत्तीसगढ़ के रायपुर में ट्रांसपोर्ट का कारोबार है। इंडियन ऑयल की नौकरी में सुकून महसूस कर रहे हरीश ने ताऊ अनिल पांडेय की प्रेरणा से प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू की और सफल हुए। तीन बहनों के बीच हरीश इकलौते भाई हैं। हरीश की सफलता पर समूचा परिवार खुशी से फूले नहीं समा रहा है।
उधर औराई क्षेत्र के सहसेपुर निवासी योगीश मिश्रा पुत्र शिव नारायण मिश्रा ने दूसरे प्रयास में 405वीं रैंक हासिल की है। हालांकि योगीश अपनी इस रैंकिंग से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। भोपाल में रहकर तैयारी कर रहे योगीश ने बताया कि ज्वाइन करने के बाद वह तैयारी जारी रखेंगे और इससे भी बेहतर रैंक प्राप्त करेंगे। पिता शिव नारायण मिश्र मध्य प्रदेश शासन में वित्त सचिव हैं। छोटा भाई लंदन में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है। योगीश ने 2010 में दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दू कॉलेज से मैथमेटिक्स से एमए किया। सिविल सर्विस का सपना संजोकर तैयारी में जुटे युवाओं को योगीश ने कहा कि सफलता का शार्टकट रास्ता नहीं है। सतत प्रयास के साथ धीरज रखने की भी आवश्यकता है।
अभोली इलाके के सरायभाव सिंह गांव निवासी प्रदीप मिश्रा ने 633वीं रैंक हासिल की है। पिता उपेंद्र भूषण मिश्रा भी आईएएस हैं और बड़ौदा में आयकर आयुक्त हैं। पारिवारिक पृष्ठभूमि का उन्हें तैयारी में फायदा मिला।