बिजनौर। आनलाइन कार्य फीड होने के बाद मस्टररोल प्रिंट होने के नए नियम में मनरेगा व ग्राम प्रधान दोनाें ही उलझ गए हैं। अहम बात है कि आनलाइन फीडिंग का न तो ग्राम प्रधानों को ही प्रशिक्षण दिया गया है और न ही अन्य कर्मचारियों को बताया गया है कि किस तरह से मस्टररोल प्रिंट होगा। साथ ही ज्यादातर ग्राम प्रधानाें के पास कंप्यूटर नहीं हैं। नतीजा मनरेगा की रफ्तार अब धीमी पड़ती नजर आ रही है।
विदित हो कि एक अगस्त से मनरेगा में नया नियम शुरू हुआ है, जिसके तहत ग्राम पंचायत या सरकारी विभाग में मनरेगा कार्य कराने के लिए अब मस्टररोल नेट से प्रिंट किया जाएगा। मस्टररोल प्रिंट करने के लिए मनरेगा में होने वाले कार्य का विवरण आनलाइन फीड करना होगा। कार्य की लागत, कहां पर काम हो रहा है, मार्ग या तालाब की लंबाई चौड़ाई, काम शुरू करने तिथि आदि बातें फीड करने के बाद ही मस्टररोल प्रिंट होगा, उसी के बाद मनरेगा में ग्राम प्रधान कार्य करा सकेंगे। नियम लागू कर दिया गया है, मगर इस कार्य के लिए अभी तक किसी को प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
उधर, हालात ये हैं कि ग्राम प्रधानों के पास कंप्यूटर नहीं है। पूरे विकास खंड में एक ही कंप्यूटर ऑपरेटर है, ब्लॉक में हो रहे मनरेगा कार्याें के अलावा अन्य विकास कार्यों की फीडिंग का काम केवल इसी ऑपरेटर पर रहता है। प्रशिक्षण नहीं मिलने से प्रधान व अन्य कर्मचारी साइबर कैफे पर भी मस्टररोल प्रिंट नहीं करवा पा रहे हैं। पुरानी व्यवस्था में ढेर सारे मस्टररोल पहले से ही प्रिंट कर लिए जाते थे, जिन्हें डिमांड के हिसाब से ग्राम प्रधानों को दिया जाता था। मस्टररोल खराब होने के बाद दूसरे का उपयोग कर लिया जाता था, लेकिन अब नई व्यवस्था में दूसरा मस्टररोल लेने के लिए आनलाइन ही पुराने को निरस्त करने के बाद दूसरा मस्टररोल प्रिंट किया जा सकता है।
अधिकारी कहिन
डीआरडीए के अवर अभियंता चरन सिंह का कहना है कि नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब मनरेगा का कार्य फीड करने के बाद मस्टररोल प्रिंट हो सकेगा।