धामपुर। वॉयरल ने क्षेत्र में बुरी तरह अपना प्रकोप फैला शुरू कर दिया है। इसकी चपेट में आने से प्रतिदिन अस्पतालों में रोगियों की संख्या में बढ़ती जा रही है। वहीं सीएचसी अस्पताल चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है।
मौसम बदलने से अचानक बढ़ी ठंड ने लोगों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। डा. एचएम गुप्ता का कहना है इसकी वजह यह है मौसम तो बदल रहा है पर आदमी इससे सतर्क नहीं हो रहा है। सुबह शाम को लोगों को गर्म कपड़े पहनने की शुरूआत कर देनी चाहिए ताकि बीमारियों से बचा जा सके। इन दिनों वॉयरल, टायफाइड, खांसी, जुकाम, एलर्जी, पेट में दर्द, दस्त आदि बीमारी फैली हुई हैं जो एक सप्ताह से पहले किसी मरीज का पीछा नहीं छोड़ रही है। सीएचसी की ओपीडी बढ़कर 250 से 600 पहुंच गई है। पीएचसी में भी पहले से मरीजों की संख्या में दिनाेंदिन बढ़ोतरी हो रही है।
बचने का उपाय
* गर्म कपड़े जल्द पहनाना शुरू कर दें।
* फ्रीज के पानी की जगह सादे पानी का प्रयोग करें।
* खानपान की वस्तुओं में हिदायत बरतें।
* मच्छरों से बचें, पानी जमा न होने दें।
ठंडक ने बढ़ाई दुश्वारियां
बिजनौर। मौसम ने करवट बदलनी शुरू कर दी है। मौसम के मिजाज और रात के समय हल्की ठंड ने सीओपीडी (क्रोनिक आब्स्ट्रेेक्टिव पल्मोनरी डिसीज) के रोगियों की मुश्किलें बढ़ा दी है। मौसम की वजह से चिकित्सकों के पास आने वाले सीओपीडी व अस्थमा के रोगियों में दोगुने की वृद्धि हुई है।
ठंड के बढ़ने के साथ ही वायु में नमी आने लगती है। हल्की नम वायु के साथ धुएं व धूल के कण भी सांस नली में चले जाते है जो अंदर जाकर सांस नली में जम जाते है तथा फेफड़ों को प्रभावित करते हैं। इस स्थिति को ब्रोनक्राइटस कहते है। इसमें मरीज को छाती में जकड़न, नजला खांसी, बलगम का आना, सांस फूलना, आदि समस्या होने लगती है। इस स्थिति में थोड़ी लापरवाही बरते जाने पर सांस नली में इंफेक्शन होने पर बुखार, अधिक बलगम आना के साथ सांस नली सिकुड़ने लगती है। बलगम के आने से सांस नली बंद होने लगती है तथा मरीजों को आक्सीजन की आवश्यकता पड़ती है। इस समय चिकित्सकों के पास ऐसे मरीजों की लाइन लगनी शुरू हो गई। चिकित्सक मरीजाें को ठंड से बचकर रहने की सलाह दे रहे है।
बचाव:
- गर्म कपड़े अधिक पहनकर रखे।
- धुएं व धूल वाले स्थान से बचकर रहे।
- धूम्रपान बिल्कुल भी न करे।
- चिकित्सक की सलाह पर लगातार इनहेलर का प्रयोग करें।
- सलाह पर व्यायाम प्रतिदिन करे।
- सार्वजनिक कार्यस्थलों पर जाने से बचे।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डा. राजकुमार का कहना है कि सांस फूलने या सीने में जकड़न होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सीओपीडी व अस्थमा के रोगियो की संख्या में वृद्धि हुई है। जहां पहले प्रतिदिन करीब 15 मरीज आते थे, अब उनकी संख्या 25-30 पहुंच गई है।