धामपुर । पशु चिकित्सालयों में बरसीम का बीज न मिलने से क्षेत्र के किसान परेशान हैं। वहां पशु अस्पताल में उपलब्ध जेई का बीज भी खुले बाजार से पांच रुपये अधिक होने के कारण इक्का दुक्का ही किसान बीज खरीद रहे हैं । उधर, पशु चिकित्साधिकारी से किसानों को सुझाव दिया कि वे पहले जेई की बुवाई करें। बाद में जेई के खेत में ही बरसीम की बुवाई की जा सकती है।
हर वर्ष बरसीम का बीज पशु पालन और कृषि विभाग के गोदामों में आता है। लेकिन इस बार बरसीम का बीज कृषि विभाग के गोदामों को नहीं भेजा। विभागीय अफसरों ने बताया कि सरकार ने इस बार बरसीम का बीज कृषि विभाग को न देकर पशुपालन विभाग के माध्यम से बेचने की योजना बनी है। योजना के तहत यह बीज पशुपालन विभाग में आना चाहिए था। पता नहीं देरी क्यों हुई।
उधर, पशु चिकित्साधिकारी राकेश रस्तौगी ने बताया कि यह बात सही है कि बरसीम और जई का बीज एक साथ आना था। लेकिन अभी तक विभाग ने बरसीम का बीज नहीं भेजा है। साढ़े सात कुंतल जई विभाग को मिली है। इस जई का मूल्य बाजार से पांच रुपये अधिक है। 27 रुपये प्रति किलो के हिसाब से विभाग को जई की ब्रिकी करनी है। रेट ज्यादा होने के कारण कोई इक्का दुक्का किसान ही जई खरीदने के लिए अस्पताल में आ रहा है। पशु चिकित्साधिकारी ने किसानों को सुझाव दिया कि किसानों को पहले जई की बुवाई करनी चाहिए। जब जई जम जाए तो बाद में पहले पानी पर बरसीम बिखेर देना चाहिए। ऐसा करने से बरसीम और जई चारा पशुओं के सर्वोत्तम होता है।